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क्या ज्‍योतिष मूलत: भविष्‍य की तलाश है?PART-02

क्या ज्‍योतिष के अलावा भविष्‍य को जानने के और भी आयाम है?

03 FACTS;-

1-ज्‍योतिष सिर्फ इतनी ही बात नहीं है कि ग्रह-नक्षत्र क्‍या कहते है या उनकी गणना क्‍या कहती है। सिर्फ ज्‍योतिष

ही नहीं बल्कि भविष्‍य को जानने के और भी आयाम भी है।मनुष्‍य के हाथ पर खींची हुई रेखाएं है, मनुष्‍य के माथे पर खींची हुई रेखाएं है, मनुष्‍य के पैर पर खींची हुई रेखाएं है।इसके अलावा मनुष्‍य के शरीर में छिपे हुए चक्र है। उन सब चक्रों के अलग-अलग संवेदन , अलग-अलग गति /फ्रीक्‍वेंसी और उनकी जांच है।आपके हाथ की रेखा तो आपके मन के बदलने से इसी वक्‍त भी बदल सकती है। आपके आयु की जो रेखा है, अगर आपको हिप्रोटाइज करके भरोसा दिलवा दिया जाए की आप पन्‍द्रह दिन बाद मर जाएंगे। तो आप चाहे मरो या न मरो, लेकिन आपके उम्र की रेखा पन्‍द्रह दिन के समय पहुंचकर टूट जाएगी ...रेखा में गैप आ जाएगा। शरीर स्‍वीकार कर लेता है कि ठीक है, मौत आती है।

2-शरीर पर जो रेखाएं है ...वह तो बहुत ऊपरी घटनाएं है;मन भीतर गहरे में है और जिस मन को आप जानते है; वही गहरे में नहीं है बल्कि बहुत ऊपर है। बहुत गहरे में तो वह मन है; जिसका आपको पता नहीं है। इस शरीर में भी गहरे में जो चक्र है, जिनको योग चक्र कहते है, वह चक्र आपकी जन्‍मों-जन्‍मों की संपदा की संग्रहीत रूप है। आपके चक्र पर हाथ रखकर जो जानता है वह जान सकता है कि उस चक्र की कितनी गति है। आपके सातों चक्रों को छूकर जाना जा सकता है कि आपने

कभी कुछ अनुभव किए है या नहीं।आमतौर से एकाध या ज्‍यादा से ज्‍यादा दो चक्रों के सिवाय, तीसरा चक्र शुरू ही नहीं होता। उसने कभी गति ही नहीं की है , वह बन्द ही पडा है। उसका आपने कभी उपयोग ही नहीं किया है;तो वह आपका अतीत है। उसे जानकर अगर कोई पूछे कि उसके सातों चक्र चल रहे है ;तो उससे कहा जा सकता है कि यह तुम्‍हारा अंतिम जीवन है, अगला जीवन नहीं होगा। क्‍योंकि सात चक्र चल गए हों तो अगले जीवन का अब कोई उपाय नहीं है। इस जीवन में निर्वाण हो जाएगा, मुक्‍ति हो जाएगी।

3-आमतौर से जब कोई आध्यात्मिक गुरु के पास आता है तो अध्यात्मिक गुरु यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि उस व्‍यक्‍ति के कितने चक्र चल रहे है। उसके साथ कितनी मेहनत करनी उचित है,या उसके साथ मेहनत करने का कोई परिणाम होगा या नहीं होगा। कब हो पाएगा या कितने जन्‍म लगेंगे ..आदि? ज्‍योतिष अनेक-अनेक मार्गों से भविष्‍य को टटोलने की चेष्‍टा है। उनमें एक मार्ग जो सर्वाधिक प्रचलित हुआ,वह है मनुष्‍य के ऊपर ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव। परन्तु उसके लिए वैज्ञानिक आधार होना चाहिए। इतना तय हो गया है कि जीवन प्रभावित है।वैज्ञानिकों को दूसरी बात की कठिनाई है कि क्‍या एक-

एक व्‍यक्‍ति अगल-अलग ढंग से...,व्‍यक्‍तिगत रूप से प्रभावित है। लेकिन यह इतनी परेशानी की बात नहीं है।अगर

प्रकृति एक-एक व्‍यक्‍ति को अलग-अलग ढंग का Individual अंगूठा दे सकती है और Repeat नहीं करती है।तो प्रकृति इतनी बारीकी से हिसाब रख सकती है कि एक-एक व्‍यक्‍ति को जो अंगूठा देती है , उसकी छाप किसी दूसरे व्‍यक्‍ति की छाप जैसी कभी नहीं होती।यहाँ तक कि एक अंडे के दो जुड़वा बच्‍चों के भी अंगूठे एक जैसे नहीं होते। उनके भी दोनों अँगूठों की छाप अलग होती है। अगर प्रकृति एक-एक व्‍यक्‍ति को इतना व्‍यक्‍तित्‍व दे पाती है तो विशिष्‍ट आत्‍मा और जीवन न दे पाए, ऐसा कोई कारण नहीं हो सकता।

क्या है टाईम ट्रैक?टाइम ट्रैक और ज्‍योतिष में क्या सम्बन्ध है?

07 FACTS;-

1-मनुष्‍य के पास छिपे हुआ अतीत का पूरा संस्‍कार बीज है..एक टाईम ट्रैक है। इस अनंत यात्रा में प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जहां भी जिया है; पृथ्वी पर या कहीं और किसी ग्रह पर...मनुष्‍य की तरह या जानवर की तरह या पौधे की तरह या पत्‍थर की तरह।उसका पूरा का पूरा टाईम ट्रैक, समय की पूरी की पूरी धारा उसके भीतर अभी भी संरक्षित है। वह धारा खोली जा सकती है और उस धारा में व्‍यक्‍ति को पुन: प्रवाहित किया जा सकता है।

2-वैज्ञानिक खोजों में यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है।वास्तव में,एक तो मनुष्‍य के भीतर स्‍मृति है जिससे हम याद रखते है कि कल यह हुआ, परसों क्‍या हुआ। वह स्‍थायी भी नहीं है। यह हमारी काम चलाऊ स्‍मृति है जिससे हम रोज काम करते है, इसे रोज फेंक देते है। और उससे गहरी एक स्मृति है जो काम चलाऊ नहीं है ;जो हमारे जीवन के समस्‍त अनुभवों का सार है,

अनंत जीवन पथों पर लिए गए अनुभवों का सार इक्ट्ठा है।वह हमारे भीतर ingrain हो गयी है / भीतर गहरे में पूरी की पूरी दबी हुई पड़ी है । जैसे कि एक टेप ...उसे खोला जा सकता है। और जब उसे खोला जाता है तो अध्यात्म उसको जाति-स्‍मरण कहता है और विज्ञान उसको टाईम ट्रैक कहता है अथार्त समय में पीछे लौटना । जब उसे खोला जाता है तो ऐसा नहीं होता कि आपको अनुभव हो कि आप याद कर रहे है या आप पुन: जी रहे है।

3- उदाहरण के लिए आपको याद आ रहा है कि आप पांच वर्ष के बच्‍चे है और आपकी माँ ने चांटा मारा है।वास्तव में,

आपको ऐसा याद नहीं आयेगा कि आप घटना याद कर रहे है बल्कि ‘’यू विल री- लिव इट’’ /आप इसको पुन: जिएँगे । और जब आप इसको जी रहे होंगे;उस वक्‍त कोई आपसे नाम पूछे तो आप अपने बचपन का ही नाम बताएंगे ;ना कि वर्तमान नाम।

अथार्त यदि आपका नाम उस समय पप्पू था तो आप वही नाम बताएंगे।अथार्त 5 वर्ष का बच्चा ही उत्तर देगा।क्योकि उस वक्‍त,आप स्‍मरण नहीं कर रहे है..आप री- लिव कर रहे है ।

4-अगर आपको पिछले जन्‍म में ले जाया गया है और आप याद कर रहे है कि आप एक घोडा है तो उस वक्‍त आप बिलकुल हिनहिनाना शुरू कर देगे। आप मनुष्य की तरह नहीं बोलेंगे।अगर आप याद कर रहे है कि आप एक पत्‍थर की तरह है और आपसे कुछ पूछा जाए तो आप बिलकुल मौन रह जाएंगे, आप बोल नहीं सकते। आप पत्‍थर की तरह ही रह जाएंगे।उदाहरण के लिए एक तीस साल का व्‍यक्‍ति है जो ठीक से नहीं बोल पाता।तो इसका अर्थ है कि वह बचपन की किसी स्मृति पर

अटक गया है। उसके आगे नहीं बढ़ पाया है।

5-यदि उसको टाईम ट्रैक पर वापस लाया जाये तो वह छह वर्ष का हो जाएगा।जहां वह रूक गया ,जहां से वह आगे नहीं बढ़ा, फिर वह वापस पहुंच जाएगा। धारा टूट जाएगी और वह वापस लौट आएगा। तब वह तीस साल का हो जाएगा। वह जो बीच में चौबीस साल का फासला था ;वह उसको पार कर देगा। और हैरानी की बात है कि हजारों दवाईयां उस को बोलने में समर्थ नहीं बना पाई थीं लेकिन यह टाईम ट्रैक पर लौटकर जाना और पुन: वापस लौट आना....वह बोलने में समर्थ हो जाएगा।

आप को बहुत दफा जो बीमारियां आती है;वह केवल टाईम ट्रैक की वजह से आती है। बहुत सी बीमारियां है, जैसे दमा। दमा के मरीज की तारीख भी तय रहती है।

6-हर साल ठीक तारीख पर उसका दमा लौट आता है और इसलिए दमा की कोई चिकित्‍सा नहीं हो पाती। क्‍योंकि बीमारी नहीं है,टाईम ट्रैक की बीमारी है, कहीं स्‍ट्रक हो गयी, कहीं मैमोरी अटक गयी है और जब फिर वहीं व्‍यक्‍ति उस समय को स्मरण कर लेता है ..तारीख, दिन.वगैरह ।तब वह तैयारी कर रहा है, वह घबरा रहा है कि अब होने वाला है।वास्तव में ,

इस बार उसको जो दमा होगा ..,वह दमा नहीं है‘’ही इज़ री- लिविंग’’। वह सिर्फ पिछले साल की एक तारीख को री लिव कर रहा है। मगर अब आप उसका इलाज करेंगे जबकि उसका इलाज करने से कोई मतलब नहीं है। क्‍योंकि अब वह एक साल पहले वाला व्यक्ति नहीं है जिसका इलाज किया जा सके।वह दवाईयाँ बेकार खा रहा है। क्‍योंकि दवाएं उस व्यक्ति में जा रही है जो अभी है; और बीमार वह व्यक्ति है जो एक साल पहले था।

7-इन दोनों के बीच कोई तारतम्‍य नहीं है, कोई संबंध नहीं है। आपकी हर दवा की असफलता, उसके दमा को मजबूत कर जाएगी और कह जाएगी कि कुछ नहीं होने वाला है। वह फिर अगले साल की तैयारी कर रहा है। सौ में से सत्‍तर बीमारियां टाईम ट्रैक पर आधारित है। घटित हो रही है, पकड़ी गई है ; और जो पीछे लौट कर ले जाती है। हम लौट-लौट कर जी लेते

है। ज्‍योतिष सिर्फ नक्षत्रों का अध्‍ययन नहीं है बल्कि अलग-अलग आयामों से मनुष्‍य के भविष्‍य को टटोलने की चेष्‍टा है।भविष्‍य पकड़ने के लिए अतीत को पकड़ना जरूरी है। उसे पकड़ने के लिए अतीत के जो चिन्‍ह आपके शरीर और आपके मन पर भी छूट गये है,उन्‍हें पहचानना जरूरी है।जब से ज्‍योतिषी शरीर के चिन्‍हों पर बहुत अटक गए है तब से ज्‍योतिष की गरिमा खो गई है, क्‍योंकि शरीर के चिन्‍ह बहुत उपरी है।

क्या ज्‍योतिष मूलत: भविष्‍य की तलाश है?

14 FACTS;-

1-ज्‍योतिष बहुत वैज्ञानिक चिन्‍तन है। वह यह कहता है कि भविष्‍य अतीत से ही निकलता है। आपका 'आज' कल से निकला है और आपका 'कल' आज से निकलेगा। ज्‍योतिष यह भी कहता है कि जो कल होने वाला है वह किसी सूक्ष्‍म अर्थों में

आज भी मौजूद होना चाहिए।उदाहरण के लिए अब्राहम लिंकन ने मरने के तीन दिन पहले एक सपना देखा। जिसमें उसने देखा कि उसकी हत्‍या कर दी गई है और व्‍हाइट हाऊस के एक खास कमरे में उसकी लाश पड़ी है। उसने कमरे का नंबर भी देखा। उसकी नींद खुल गई। वह हंसा, उसने अपनी पत्‍नी को कहा कि मैने एक सपना देखा है कि मेरी हत्‍या कर दी गयी है....फलां-फलां नंबर, उसी मकान में तो वह सोया हुआ था ..व्‍हाइट हाउस मे। इस मकान के फलां नम्बर के कमरे में मेरी लाश पड़ी है। मेरे सिरहाने तू खड़ी हुई है और आस-पास फलां-फलां लोग खड़े हुए है। हंसी हुई, बात हुई ...लिंकन सो गया, पत्‍नी सो गई। तीन दिन बाद लिंकन की हत्‍या हुई और उसी कमरे में और उसी जगह उसकी लाश तीन दिन बाद पड़ी थी। और उसी क्रम में आदमी खड़े थे।

2-अगर तीन दिन बाद जो होने वाला है वह किसी अर्थों में आज ही न हो गया हो तो उसकी सपने में झलक भी कैसे मिल सकती है। सपने में झलक तो उसी बात की मिल सकती है जो किसी अर्थ में अभी भी कहीं मौजूद हो। तो हम उसकी एक ग्‍लिम्‍प्‍स ले और हमें दिखायी पड़ जाए लेकिन वह कहीं मौजूद तो हो। ज्‍योतिष का मानना है कि भविष्‍य हमारा अज्ञान है

इसलिए भविष्‍य है। अगर हमें ज्ञान हो तो भविष्‍य जैसी कोई घटना नहीं है। वह अभी भी कहीं मौजूद है।महावीर के जीवन में एक घटना का उल्लेख है, जिस पर एक बहुत बड़ा विवाद चला। और महावीर के अनुयायियों का एक वर्ग टूट गया। और पाँच सौ महावीर के मुनियों ने उसी बात से अलग पंथ का निर्माण कर लिया ।महावीर कहते थे जो हो रहा है वह एक अर्थ में हो ही गया है। अगर आप चल पड़े तो एक अर्थ में पहुंच ही गए। अगर आप बूढ़े हो रहे है तो एक अर्थ में बूढ़े हो ही गए।

3-महावीर कहते थे, जो हो रहा है, जो क्रियमाण है..वह हो ही गया। महावीर का एक शिष्‍य वर्षा काल में महावीर से दूर जा रहा था। उसने अपने एक शिष्‍य को कहा कि मेरे लिए चटाई बिछा दो। उसने चटाई बिछानी शुरू की। मुड़ी हुई, गोल लिपटी हुई चटाई को उसने थोड़ा सा खोला, तब महावीर के उस शिष्‍य को ख्‍याल आया कि ठहरो, महावीर कहते है—जो हो रहा है वही हो ही गया। तू आधे में रूक जा, चटाई खुल तो रही है, लेकिन खुल नहीं गयी है ...रूक जा। उसे अचानक ख्‍याल

हुआ कि यह तो महावीर बड़ी गलत बात कहते है । चटाई आधी खुली है, लेकिन खुल कहां गई है। उसने चटाई वहीं रोक दी। वह लौटकर वर्षा काल के बाद महावीर के पास आया और उसने कहा कि आप गलत कहते है कि जो हो रहा है, वह हो ही गया। क्‍योंकि चटाई अभी भी आधी खुली रखी है—खुल रही थी, लेकिन खुल नहीं गई। तो मैं आपकी बात गलत सिद्ध करने आया हूं।

4-महावीर ने कहा, तूने रोका ...रोक ही रहा था...और रूक ही गया। तूने सिर्फ चटाई रुकते देखी,एक और क्रिया भी साथ चल रही थी, वह हो गयी। और फिर कब तक तेरी चटाई रुकी रहेगी। खुलनी शुरू हो गयी है—खुल ही जाएंगी....तू लौट कर जा । वह जब लौटकर गया तो देखा एक आदमी उस पर लेटा हुआ विश्राम कर रहा था। इस आदमी ने सब गड़बड़ कर

दिया। पूरा सिद्धांत ही खराब कर दिया।महावीर जब यह कहते थे जो हो रहा है वह हो ही गया तो वह कहते थे, जो हो रहा है वह तो वर्तमान है, जो हो ही गया वह भविष्‍य है।कली खिल रही है ;खिल ही गई ..खिल ही जाएगी। वह फूल तो भविष्‍य में बनेगी, अभी तो खिल ही रही है।जब खिल ही रही है तो उसका खिल जाना भी कहीं घटित हो गया।

5-वास्तव में, हमारा जो चिन्‍तन है, आमतौर से Past ओरिएंटेड़ है, वह अतीत से बंधा है। कहते है कली खिल रही है , फूल की तरफ जा रही है। कली फूल बनेगी...लेकिन इससे उल्‍टा भी हो सकता है। यह ऐसा है जैसे कोई आपको पीछे से धक्‍के दे रहा है ,कोई आपको आगे सरका रहा है। ऐसा भी हो सकता है कोई आपको आगे खींच रहा हो। गति दोनों तरफ हो सकती

है। ज्‍योतिष का मानना है कि यह अधूरी बात है कि अतीत धक्‍का दे रहा है और भविष्‍य हो रहा है। पूरी दृष्‍टि यह है कि अतीत धक्‍का दे रहा है और भविष्‍य खींच रहा है।अभी वर्तमान के क्षण में एक कली है।पूरा अतीत धक्‍का दे रहा है कि खुल जाओ और पूरा भविष्‍य आह्वान दे रहा है कि खुल जाओ ।अतीत और भविष्‍य दोनों के दबाव में कली फूल बनेगी।

6-अगर कोई भविष्‍य न हो तो अतीत अकेला फूल न बना पाएगा। क्‍योंकि भविष्‍य में फूल बनने के लिए आकाश चाहिए...

उदाहरण के लिए कृष्‍ण मूर्ति की जन्‍म कुण्‍डली देखें तो हैरान होंगे। अगर ऐनिबीसेन्ट और लिड बिटर ने फिक्र की होती और कृष्‍ण मूर्ति की जन्‍म कुण्‍डली देख ली होती तो भूलकर भी कृष्‍ण मूर्ति के साथ मेहनत नहीं करनी चाहिए थी। क्‍योंकि जनम कुण्‍डली में साफ बात है कि कृष्‍ण मूर्ति जिस संगठन से सम्‍बन्‍धित होंगे उस संगठन को नष्‍ट करनेवाले होंगे ,उस संस्‍था को विसर्जित करवा देंगे , वह संगठन मर जाएगा।लेकिन ऐनिबीसेन्ट भी मानने को तैयार नहीं होती।पाते ।उदाहरण के लिए

कृष्‍ण मूर्ति की जन्‍म कुण्‍डली देखें तो हैरान होंगे। अगर ऐनिबीसेन्ट और लिड बिटर ने फिक्र की होती और कृष्‍ण मूर्ति की जन्‍म कुण्‍डली देख ली होती तो भूलकर भी कृष्‍ण मूर्ति के साथ मेहनत नहीं करनी चाहिए थी। क्‍योंकि जनम कुण्‍डली में साफ बात है कि कृष्‍ण मूर्ति जिस संगठन से सम्‍बन्‍धित होंगे—उस संगठन को नष्‍ट करनेवाले होंगे ,उस संस्‍था को विसर्जित करवा देंगे , वह संगठन मर जाएगा।लेकिन ऐनिबीसेन्ट भी मानने को तैयार नहीं होती।

7-कोई सोच भी नहीं सकता था, लेकिन हुआ वही। थियोसाफी ने उन्‍हें खड़ा करने की कोशिश की थी। थियोसाफी आन्‍दोलन को उनकी वजह से इतना धक्‍का लगा की वह सदा के लिए मर गया । फिर ऐनिबी सेन्ट ने ‘’स्‍टार ऑफ दी ईस्‍ट‘’ नाम से बड़ी संस्‍था खड़ी की। फिर एक दिन कृष्‍ण मूर्ति उस संस्‍था को विसर्जित करके अलग हो गए। ऐनिबीसेन्ट ने पूरा जीवन उस संस्‍था को खड़ा करने में समर्पित किया और नष्‍ट किया अपने को। लेकिन उसमें कृष्‍ण मूर्ति का भी कुछ बहुत हाथ नहीं है। वह जिन नक्षत्रों की छाया में पैदा हुए है ..उन नक्षत्रों की सीधी सूचना है। वह किसी भी संस्‍था में डिस्ट्रिक्ट सिद्ध होंगे... विघटनकारी सिद्ध होंगे।

8-प्रोफट्स और विज़नरीज़ /सपने देखन वाले लोग तो दूर-दूर की चीजें देख लेते है। उनके लिए तो भविष्‍य भी वर्तमान का ही

फैलाव है।परन्तु विज्ञान तो एक-एक इंच सरकता है। ज्‍योतिष मूलत: भविष्‍य की तलाश है और विज्ञान मूलत: अतीत की तलाश है। विज्ञान इसी बात की खोज है कि Cause/ कारण क्‍या है जबकि ज्‍योतिष इसी बात की खोज है कि Effect/परिणाम क्‍या होगा। इन दोनों के बीच बड़ा भेद है। लेकिन फिर भी विज्ञान को रोज-रोज अनुभव होता है। कुछ बातें जो अनहोनी लगती थी, कभी सही नहीं हो सकतीं, वह सही होती हुई मालूम पड़ती है।अब वैज्ञानिक इसको स्‍वीकार कर लिए है कि प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति

अपने जन्‍म के साथ बिल्‍ट-इन अपना व्‍यक्‍तित्‍व लेकर पैदा होता है। इसको पहले वह मानने को राज़ी नहीं थे। ज्‍योतिष इसे सदा से कहता रहा है।

9-उदाहरण के लिए एक आम का बीज है। जब हम आम के बीज को बो देंगे तो जो वृक्ष पैदा होता है उसकी बिल्‍ट-इन प्रोग्राम होना चाहिए ,ब्ल्यू प्रिंट होना चाहिए।वर्ना यह आम का बीज तो बेचारा ...न कोई विशेषज्ञों की सलाह लेता है , न किसी

यूनिवर्सिटी में शिक्षा पाता है।तो यह आम के वृक्ष को कैसे पैदा कर लेता है। इसमें वैसे ही पत्‍ते जाते है, वैसे ही आम लग जाते है। इस बीज, गुठली के भीतर छिपा हुआ कोई प्रोग्राम चाहिए,नहीं तो बिना प्रोग्राम के यह बीज क्‍या कर पायेगा। इसके भीतर सब मौजूद चाहिए । जो भी वृक्ष में होगा वह कहीं न कहीं छिपा ही होना चाहिए। हमें कहीं दिखाई नहीं पड़ता। लेकिन होना तो चाहिए अन्‍यथा आम के बीज से फिर नीम निकल सकती है। भूल-चूक हो सकती है ...लेकिन कभी भूल-चूक होती दिखाई नहीं पड़ती।

10-इस छोटे से बीज में सारी की सारी सूचनाएं छिपी हुई है कि इस बीज को क्‍या करना है , कैसे अंकुरित होना है, कैसे पत्‍ते, कैसे शाखाएं, कितना बड़ा वृक्ष, कितनी उम्र का वृक्ष, कितना ऊँचा उठना है। कितने फल लगेंगे, कितने मीठे होंगे, पकेंगे कि नहीं पकेंगे, यह सब इसके भीतर छिपा होना चाहिए। अगर आम के बीज के भीतर यह सब छिपा है तो आप जब मां के पेट में

आते है तो क्या आपके बीज में सब छिपा नहीं होगा।अब वैज्ञानिक स्‍वीकार करते है कि आँख का रंग छिपा होगा,बाल का रंग छिपा होगा। शरीर की ऊँचाई छिपी होगी। स्‍वास्‍थ्‍य-अस्‍वास्‍थ्‍य की सम्‍भावनाएं छिपी होगी। बुद्धि का अंक छिपा होगा, क्‍योंकि इसके सिवाय कोई उपाय नहीं है कि आप विकसित कैसे होंगे।आपके पास अग्रिम प्रोग्राम चाहिए—कोई हड्डी हाथ बन जाएगी, फिर पैर बन जाएगी। Skin का एक हिस्‍सा आँख बन जाएगा, एक हिस्‍सा कान बन जायेगा। एक हड्डी सुनने लगेगी,एक हड्डी देखने लगेगी। ये सब कैसे होगा?

11-वैज्ञानिक पहले कहते थे, सब संयोग है, लेकिन संयोग शब्‍द बहुत अवैज्ञानिक मालूम पड़ता हे। संयोग का मतलब है ..By Chance, तो फिर कभी पैर देखने लगे और कभी हाथ सुनने लगे और इतना संयोग कभी नहीं होता।ज्‍योतिष कहता है कि बीज को सब उपलब्‍ध है अथार्त ज्‍योतिष ज्‍यादा वैज्ञानिक बात कहता है।अब तक हम सब समझते रहे है कि ज्‍योतिष Superstitious/अंधविश्‍वास मात्र है।वृक्ष के लिए तो वैज्ञानिक घोषणाएँ करते है। हम अगर बीज को पढ़ पाये, /डी-कोड कर पाएँ, तो हम मनुष्य के लिए भी पूर्व घोषणाएँ कर सकते है।हजारों वर्ष से हमारी कोशिश यही है कि जो बच्‍चा पैदा हो रहा है... वह क्‍या हो सकता है या क्‍या हो सकेगा?जन्‍म कुंडली या होरोस्‍कोप उसका ही टटोलना है कि हमें कुछ तो अन्‍दाज मिल जाए तो शायद हम उसे सुविधा दे पाएँ। शायद हम उससे आशाएं बाँध पाएँ कि जो होने वाला है, उसके साथ हम राज़ी हो जाएं।और कोई आश्‍चर्य नहीं है कि हम आज नहीं तो कल मनुष्य के बीज में झांकने में समर्थ हो जाएं।

12-ज्‍योतिष का पुराने से पुराना इजिप्‍शियन एक ग्रंथ है जिसको पाइथागोरस ने पढ़कर यूनान में ज्‍योतिष को पहुंचाया।

यह ग्रंथ कहता है ..काश हम सब जान सकें, तो भविष्‍य बिलकुल नहीं है। चूंकि हम सब नहीं जानते कुछ ही जानते है—इसलिए जो हम नहीं जानते,वह भविष्‍य बन जाता है। हमें कहना पड़ता है, शायद ऐसा हो, क्‍योंकि बहुत कुछ है जो अनजाने है। अगर सब जाना हुआ हो तो हम कह सकते है कि ऐसा ही होगा।ज्‍योतिष बहुत बातों की खोज थी। उसमें जो Inevitable

/अनिवार्य है ...उसके साथ सहयोग। वह जो होने ही वाला है, उसके साथ व्‍यर्थ का संघर्ष नहीं, जो नहीं होने वाला है उसकी व्‍यर्थ की मांग नहीं ..उसकी आकांक्षा नहीं। ज्‍योतिष मनुष्‍य को धार्मिक बनाने के लिए, तथा परम स्‍वीकार में ले जाने के लिए उपाय था। उसके बहु आयाम है।

13-जगत एक जीवंत शरीर है, आर्गैनिक यूनिटी है ..उसमें कुछ भी अलग-अलग नहीं है ;सब संयुक्‍त है। इसलिए कोई इस भ्रांति में न रहे कि वह आईसोलेटेड आइलैंड है ...एक द्वीप है छोटा सा ..अलग-थलग।कोई अलग-थलग नहीं है... सब

संयुक्‍त है और हम पूरे समय एक दूसरे को प्रभावित कर रहे है और एक दूसरे से प्रभावित हो रहे है। सड़क पर पडा हुआ पत्‍थर भी, जब आप उसके पास से गुजरते है तो आपकी तरफ किरणें फेंक रहा है। फूल भी फेंक रहा है, और आप भी ऐसे नहीं गुजर रहे है,क्योकि आप भी अपनी किरणें फेंक रहे है।ज्‍योतिष कहता है कि हम चाँद-तारों से प्रभावित होते है और चाँद-तारे भी हमसे प्रभावित होते है, क्‍योंकि प्रभाव कभी भी एक तरफा नहीं होता।

14-अगर सूरज पर धब्‍बे आते है और तूफान उठते है तो जमीन पर बीमारियां फैल जाती है। तो जमीन पर जब महान व्यक्ति पैदा होते है , शांति की धारा बहती है और ध्‍यान का गहन रूप पृथ्‍वी पर पैदा होता है तो सूरज पर भी तूफान फैलने में

कठिनाई होती है क्योकि सब संयुक्‍त है।एक छोटा सा घास का तिनका भी सूरज को प्रभावित करता है। और सूरज भी घास के तिनके को प्रभावित करता है । न तो घास का तिनका इतना छोटा है कि सूरज कहे कि 'हम तेरी फ्रिक नहीं करते'। और न सूरज इतना बड़ा है कि यह कह सके कि 'घास का तिनका मेरे लिए क्‍या कर सकता है' क्योकि जीवन संयुक्‍त है।यहां छोटा-बड़ा कोई भी नहीं है। एक आर्गैनिक यूनिटी है ..इस एकात्‍म का बोध अगर ख्‍याल में आए तो ही ज्‍योतिष समझ में आ सकता है अन्‍यथा ज्‍योतिष समझ में नहीं आ सकता है।

....SHIVOHAM....