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क्या ज्‍योतिष मूलत: भविष्‍य की तलाश है?PART-02

क्या ज्‍योतिष के अलावा भविष्‍य को जानने के और भी आयाम है?

03 FACTS;-

1-ज्‍योतिष सिर्फ इतनी ही बात नहीं है कि ग्रह-नक्षत्र क्‍या कहते है या उनकी गणना क्‍या कहती है। सिर्फ ज्‍योतिष

ही नहीं बल्कि भविष्‍य को जानने के और भी आयाम भी है।मनुष्‍य के हाथ पर खींची हुई रेखाएं है, मनुष्‍य के माथे पर खींची हुई रेखाएं है, मनुष्‍य के पैर पर खींची हुई रेखाएं है।इसके अलावा मनुष्‍य के शरीर में छिपे हुए चक्र है। उन सब चक्रों के अलग-अलग संवेदन , अलग-अलग गति /फ्रीक्‍वेंसी और उनकी जांच है।आपके हाथ की रेखा तो आपके मन के बदलने से इसी वक्‍त भी बदल सकती है। आपके आयु की जो रेखा है, अगर आपको हिप्रोटाइज करके भरोसा दिलवा दिया जाए की आप पन्‍द्रह दिन बाद मर जाएंगे। तो आप चाहे मरो या न मरो, लेकिन आपके उम्र की रेखा पन्‍द्रह दिन के समय पहुंचकर टूट जाएगी ...रेखा में गैप आ जाएगा। शरीर स्‍वीकार कर लेता है कि ठीक है, मौत आती है।

2-शरीर पर जो रेखाएं है ...वह तो बहुत ऊपरी घटनाएं है;मन भीतर गहरे में है और जिस मन को आप जानते है; वही गहरे में नहीं है बल्कि बहुत ऊपर है। बहुत गहरे में तो वह मन है; जिसका आपको पता नहीं है। इस शरीर में भी गहरे में जो चक्र है, जिनको योग चक्र कहते है, वह चक्र आपकी जन्‍मों-जन्‍मों की संपदा की संग्रहीत रूप है। आपके चक्र पर हाथ रखकर जो जानता है वह जान सकता है कि उस चक्र की कितनी गति है। आपके सातों चक्रों को छूकर जाना जा सकता है कि आपने

कभी कुछ अनुभव किए है या नहीं।आमतौर से एकाध या ज्‍यादा से ज्‍यादा दो चक्रों के सिवाय, तीसरा चक्र शुरू ही नहीं होता। उसने कभी गति ही नहीं की है , वह बन्द ही पडा है। उसका आपने कभी उपयोग ही नहीं किया है;तो वह आपका अतीत है। उसे जानकर अगर कोई पूछे कि उसके सातों चक्र चल रहे है ;तो उससे कहा जा सकता है कि यह तुम्‍हारा अंतिम जीवन है, अगला जीवन नहीं होगा। क्‍योंकि सात चक्र चल गए हों तो अगले जीवन का अब कोई उपाय नहीं है। इस जीवन में निर्वाण हो जाएगा, मुक्‍ति हो जाएगी।

3-आमतौर से जब कोई आध्यात्मिक गुरु के पास आ