Recent Posts

Archive

Tags

No tags yet.

क्या है भगवान गणेश के 32 सबसे खास रूप औरअष्टविनायक मंदिर की महिमा?

गणेश चतुर्थी पर्व ;-

04 FACTS;-

1-हरतालिका तीज (Hartalika Teej) के अगले दिन से गणेश चतुर्थी पर्व की शुरुआत हो जाती है। ये पर्व पूरे 10 दिनों तक चलता है।शुक्रवार, 10 सितंबर 2021 को रिद्धि-सिद्धि के दाता, प्रथम पूज्य, लोक मंगल के देवता, सुख संपदा और समृद्धि प्रदान करने वाले देवता भगवान श्रीगणेश का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस साल गणेश चतुर्थी पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। गणेश चतुर्थी के दिन 11 बजकर 09 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक पाताल निवासिनी भद्रा रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, पाताल निवासिनी भद्रा का योग शुभ माना जाता है।गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की कृपा से सुख-शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। भाद्रपद माह की गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति घर-घर विराजते हैं। पंडालों में इनकी बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं सभी के आर्कषण का केंद्र बिन्दु होती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र व रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान श्रीगणेश से अधिक लोकप्रिय शायद ही कोई देवता होंगे, क्योंकि हर शुभ कार्य का शुभारंभ ''श्री गणेशाय नमः'' से होता है।

2-भगवान गणेश ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। ये विघ्नहर्ता, परेशानियों को दूर करने वाले और सभी देवताओं में प्रथम पूज्य गणाधिपति ही हैं, जिन्हें किसी दूसरे का आदेश मानने की मजबूरी नहीं।हिंदू धर्म में गणपति का महत्व बहुत अधिक होता है।हर महीने की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का व्रत भक्त रखते हैं। लेकिन भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी का महत्व खास होता है। ये तीन से दस दिनों का महोत्सव होता है जो देश के हर कोने में धूम-धाम से मनाया जाता है। गण + पति = गणपति। संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक। ‘पति’ अर्थात स्वामी, ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकों के स्वामी।गणेश का अर्थ होता है गणों का ईश और आदि का अर्थ होता है सबसे पुराना यानी सनातनी।

3-मान्यता ऐसी है कि गणेश चतुर्थी में जो लोग गणेश जी को अपने घरों में विराजते हैं उनके आशीर्वाद से भक्तों के घर में रिद्धि-सिद्ध, धन-धान्य भरा रहता है। साथ ही, मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। किंतु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है।जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है। ऐसा शास्त्रों का निर्देश है। यह अनुभूत भी है।इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत हुए, इसमें संशय नहीं है। यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए-''सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः।सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥''मानसिक परेशानियों दूर करने के लिए गणेश अथर्वशीष का पाठ करना चाहिए।

4-शास्त्रों में भगवान गणेश के कई स्वरूपों का वर्णन किया गया है और मान्यता है कि इनके हर एक रूप में सुख और समृद्धि का वास होता है।गणेश जी की अलग-अलग मूर्तियां अलग-अलग तरह के फल देती हैं। सबसे ज्यादा पीले रंग की और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना शुभ होती है। नीले रंग के गणेश जी को नीले रंग के गणेश जी को "उच्छिष्ट गणपति" कहते हैं, इनकी उपासना विशेष दशाओं में ही की जाती है। हल्दी से बनी हुई या हल्दी का लेपन की हुई मूर्ति "हरिद्रा गणपति" कहलाती है, गणपति की ये मूर्ति कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है। एकदंत गणपति श्यामवर्ण के होते हैं, इनकी उपासना से अदभुत पराक्रम की प्राप्ति होती है।

भगवान गणेश के 32 सबसे खास रूप;-

32 FACTS;-

1-श्री बाल गणपति ;-

भगवान गणेश का यह स्वरूप बाल गणपति के रूप में है। भगवान के इस स्वरूप में उनकी छ: भुजाओं में अलग-अलग फल है और उनका शरीर लाल रंग का है। गणेश चतुर्थी पर बाल गणपति के इस इस रूप की पूजा होती है। यह भगवा न गणेश का बाल रूप है। यह धरती पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध संसाधनों का और भूमि की उर्वरता का प्रतीक