क्या हैं तीन मूल कैटेगरी ,तीन एलिमेंट के व्यक्ति ?-

क्या हैं तीन मूल कैटेगरी ,तीन एलिमेंट के व्यक्ति ?-


03 FACTS;-


1-तीन मूल कैटेगरी हैं... बौद्धिक-जानने वाला...एयर एलिमेंट; भावनात्मक-भावपूर्ण... वॉटर एलिमेंट; तीसरा-सक्रिय (एक्टिव)...फायर एलिमेंट।बौद्धिक (इंटलेक्चुअल) का मतलब है...जिसकी कि सच्ची, वास्तविक प्यास ‘जानने’ की है। वह जानने के लिए अपनी जान भी दे सकता है। कोई अभी विष पर काम कर रहा है, वह विष खा भी सकता है, मात्र यह जानने के लिए कि क्या होता है। हम सोच भी नहीं सकते। यह बड़ा मूर्खतापूर्ण लगता है, क्योंकि वह मर जाएगा। और ऐसे जानने का क्या अर्थ है, यदि आप मर ही जाएं! ऐसे ज्ञान से आप क्या करेंगे? किंतु बौद्धिक टाइप जानने को ,ज्ञान को जीवित रहने से, पहले रखता है। ‘जानना’ ही उसके लिए जीवन है, ‘न जानना’ ही उसके लिए मृत्यु है।उसके लिए यही आधारभूत है।उदाहरण के लिए सुकरात, गौतम बुद्ध आदि सब ज्ञान की, जानने की खोज में हैं।सुकरात कहते है कि एक अज्ञानी का जीवन जीने योग्य नहीं है। यदि तुम नहीं जानते कि जीवन क्या है, तो फिर यह अर्थहीन है। हमारे लिए यह कथन कतई अर्थपूर्ण नहीं लगता है, क्योंकि हम जीते चले जाते हैं, और हम इस आवश्यकता को महसूस ही नहीं करते कि जानें कि जीवन क्या है। यह टाइप है जो कि जानने के लिए जीता है ...दर्शन को विकसित करता है। फिलॉसफी का मतलब होता है... ज्ञान का प्रेम-जानना।जानने वाला टाइप जानने से प्रारंभ करेगा; बिना जाने कभी निर्णय नहीं लेगा। और कोई पक्ष नहीं लेगा, जब तक कि सारे कारण व नतीजे नहीं जान लिए जाते हैं। ऐसे टाइप के लोग वैज्ञानिक बनते हैं। ऐसे टाइप के लोग पूर्णतः निष्पक्ष दार्शनिक, वैज्ञानिक निरीक्षक बन सकते हैं।


2-दूसरा टाइप भावना का है-इमोटिव.... वॉटर एलिमेंट। ज्ञान पाना उनके लिए अर्थहीन है, जब तक कि कोई अनुभव न हो। कुछ भी उसके लिए तभी अर्थपूर्ण है जबकि कोई उसे महसूस भी करे। ‘अनुभव अवश्य हो।’ उनके लिए अनुभूति और भी अधिक गहरे केंद्र से-हृदय से है। जानना पहले केंद्र से जुड़ा है-बुद्धि से। अनुभव करना चाहिए-‘वन मस्ट फील’-कवि इस कैटेगरी (कोटि) से संबंधित है। चित्रकार, नर्तक, संगीतकार-इनके लिए जानना पर्याप्त नहीं है। यह बहुत रूखा है- हृदयरहित, बिना अनुभूति के। अतः एक बौद्धिक टाइप एक फूल को काट-पीट सकता है केवल जानने के लिए कि ‘वह क्या है’, किंतु एक कवि उसे चीर-फाड़ नहीं सकता, वह उसे प्रेम कर सकता है ,महसूस कर सकता है और वह जानता है, कि केवल अनुभूति के द्वारा ही वास्तविक जानना हो सकता है।अतः ऐसा हो सकता है कि एक वैज्ञानिक एक फूल के बारे में अधिक जानता हो, परंतु एक कवि मान ही नहीं सकता कि वह अधिक जानता है। एक कवि जानता है कि वह अधिक जानता है, और वह गहरे जानता है। एक वैज्ञानिक तो खाली परिचित है जबकि एक कवि कहता है-‘मैं उसकी आत्मा को जानता हूं।’


3-यह एक भिन्न ही मार्ग है भावनात्मक टाइप का जो फीलिंग से, अनुभव से जानता है। बौद्धिक टाइप के लिए अनुभव करने के लिए उसे पहले जानना होता है। प्रथम वह जानता है, और तभी अनुभव कर पाता है। उसकी अनुभूति भी जानने के द्वारा होती है।कभी फूल खिल ही रहा है, कभी फूल जवान है और वह मूड भिन्न है। और कभी फूल बूड़ा हो गया है और मरने की प्रतीक्षा कर रहा है, और कभी फूल बहुत प्रसन्न है और उत्सव मना रहा है, और कभी फूल उदास है।उसे फूलों के साथ निकटता से रहना होगा।उसे उसकी कितनी ही बहु चित्तदशाओं को अनुभव भी करना होगा।जानना होगा कि वह रात में कैसा अनुभव करता है, जब अंधेरा घिरा होता है; और सुबह जब सूरज निकला हो, तब उसे कैसा लगता है; और जब एक पक्षी उड़ता है और गीत गाता है, तब फूल कैसा महसूस करता है? उसे कैसा लगता है जब आंधी भरी हवाएं आती हैं; और तब कैसा लगता है, जब सब कुछ शांत होता है! उसे उसके स्वरूप की सारी स्थितियों में जानना होगा-बहुत निकट से-एक मित्र की तरह, एक साझीदार की तरह, एक गवाह की भांति उससे संबंधित होना पड़ेगा।


3-फिर तीसरा टाइप हैः एक्टिव /सक्रिय/ सृजनात्मक टाइप ..... फायर एलिमेंट । वह जानने अथवा अनुभव के साथ नहीं होता। उसे तो सृजन करना होता है। वह जब तक कुछ सृजन नहीं कर लेता, वह उसे नहीं जान सकता। केवल सर्जक होकर ही वह ज्ञाता बन पाता है।यह तीसरा टाइप सक्रियता में, कर्म में जीता है। कर्म के कितने ही आयाम संभव हैं, किंतु यह तीसरा टाइप कर्म-केंद्रित होता है। वह नहीं पूछता कि जीवन क्या है? जीवन का क्या अर्थ है? वह पूछेगा कि जीवन क्या करने के लिए है? क्या करना है, क्या बनाना है? यदि वह खुद निर्मित कर सके, तो वह आराम से है। उसके सृजन भिन्न-भिन्न हो सकते हैंः वह मनुष्यों का निर्माता हो सकता है। वह समाज का बनाने वाला हो सकता है। वह चित्र का बनाने वाला हो सकता है। किंतु सृजन वहां जरूर होगा।अतएव ये तीन शुद्ध आधारभूत टाइप हैं। परंतु कोई भी व्यक्ति शुद्ध टाइप नहीं है। यही कठिनाई है। कोई शुद्ध टाइप नहीं है, प्रत्येक घुलामिला है। और तीनों टाइप एक ही में समाहित हैं। अतः


4-वस्तुतः प्रश्न यह नहीं है कि आप किस टाइप के हैं? प्रश्न यह है कि कौन-सा टाइप सर्वाधिक बलवान है।कोई हो भी नहीं सकता, क्योंकि तीनों ही आपमें मौजूद हैं। यदि तीनों बराबर हैं, तो फिर आप में एक लयबद्धता है; यदि तीनों असंतुलित हैं तो आप लड़ाकू, पागल हो जाते हैं। यही कठिनाई है निश्चय करने में। इसलिए कैसे जानें कि सबसे बलशाली कौन-सा है? कैसे मालूम हो कि मैं किस टाइप का व्यक्ति हूं या कौन-सा टाइप मेरे लिए प्रथम है? तीनों वहां होंगे। इसके लिए दो परीक्षण स्मरण रखेंः एक यदि आप जानने वाले टाइप के हैं, तो आपके सारे अनुभव बुनियादी रूप से जानने से शुरू होंगे, और किसी बात से प्रारंभ नहीं होंगे। उदाहरणार्थ यदि जानने वाले टाइप का व्यक्ति किसी से प्रेम में पड़ता है तो वह पहली नजर में प्रेम में नहीं पड़ सकता। यह उसके लिए असंभव है। पहले वह जानेगा, परिचित होगा और वह एक लंबी योजना होगी। निर्णय जाने की एक लंबी प्रक्रिया से आएगा। इसलिए इस तरह के लोग सदैव बहुत से अवसर चूक जाएंगे क्योंकि यहां एक क्षण में निर्णय की आवश्यकता होती है और इस टाइप का व्यक्ति एक क्षण में कोई निर्णय नहीं ले सकता! 5-एलिमेंट में बहुत-सी बातें समझने योग्य हैं।यदि एक बौद्धिक टाइप का व्यक्ति ...एयर एलिमेंट,ठीक-ठीक विकसित होता है, तो वह बुद्ध हो जाएगा। परंतु यदि वह गलत मार्ग पर चला जाए, बिंदु को चूक जाए, तो विक्षिप्त हो जाएगा। जानने से वह आत्म-ज्ञान को उपलब्ध नहीं होगा बल्कि जानने से वह विक्षिप्त हो जाएगा। क्योकि जानने से वह संदेह खड़े करता चला जाएगा-संदेह, संदेह और संदेह। और अंत में अपने ही संदेहों में उलझकर वह विक्षिप्त हो जाएगा।भावनात्मक टाइप ... वॉटर एलिमेंट में मीरा का नाम हैं।यदि भावना सही मार्ग में यात्रा करे, तो वह दिव्य प्रेम के रूप में विकसित होगी। किंतु उसकी भावना गलत मार्ग पर चली जाती है, और तब वह एक विकृत व्यक्ति हो जाता है, मात्र असामान्य रूप में विक्षिप्त। यदि भावना-प्रधान गलत यात्रा करे, तो वह विकृति को उपलब्ध होगा। यदि एयर एलिमेंट गलत चला जाए, तो वह संदेह से विक्षिप्त होगा।और तीसरा है, कर्म। यदि कोई ठीक यात्रा करे तो महात्मा गांधी हो जाएगा। यदि यह वह गलत यात्रा कर ले, तो अडोल्फ हिटलर होगा। दोनों कर्म-जगत के लोग हैं। वे बिना कुछ किए नहीं रह सकते। किंतु करना विक्षिप्त हो सकता है। और हिटलर विक्षिप्त है। वह कर्म कर रहा था, किंतु उसका करना विनाशकारी हो जाता है।यदि कर्म पहले आ जाता है, और फिर भाव, और फिर विचार तो आप अपना सर्वोपरि गुण जान सकते हैं और यह सर्वोपरि गुण जान लेना बहुत ही सहायक है, क्योंकि तब आप सीधे बढ़ सकते हैं, अन्यथा आपकी प्रगति टेड़ी-मेड़ी होती रहेगी। यदि सृजनात्मक टाइप ठीक मार्ग पर जाता है, तो सृजन करता है; पर यदि गलत मार्ग पर जाता है, तो वह विध्वंसकारी हो जाता है।


6-हिटलर कहता है '' यह अडोल्फ हिटलर नहीं बोल रहा है , यह इतिहास की पूरी आत्मा बोल रही है। यह आर्यों का सारा मन बोल रहा है। यह सारी जाति का मन मेरे माध्यम से बोल रहा है।’' और वास्तव में, जिन्होंने हिटलर को सुना है उन्होंने ऐसा अनुभव किया है, कि जब वह बोल रहा होता था तो वह अडोल्फ हिटलर बिल्कुल नहीं होता था। ऐसे लगता था जैसे कि वह एक बड़ी शक्ति का वाहन मात्र हो।कर्म-प्रधान व्यक्ति सदैव ऐसा दिखलाई पड़ता है, क्योंकि वह इतनी जल्दी क्रिया करता है कि आप नहीं कह सकते कि वह निर्णय लेता है, कि वह सोचता है, कि वह महसूस करता है।और कर्म इतना स्वतःस्फूर्त होता है कि वह जानने ही नहीं पाता कि कहां से वह कर्म आता है। अतः या तो वह परमात्मा से आता है या फिर शैतान से आता है, परंतु वह कहीं और से आता है। और तब हिटलर और महात्मा गांधी दोनों ही उसके लिए तर्क देते चले जाते हैं, किंतु वे निर्णय पहले ले लेते हैं।उदाहरण के लिए, महात्मा गांधी ने लंबे उपवास के लिए तय किया। अर्द्ध-रात्रि वे उठे, तब उन्होंने निश्चय किया। फिर सवेरे उन्होंने अपने मित्रों से कहा कि ‘मैं जीवन पर्यन्त उपवास के लिए जाता हूं।’ कोई भी नहीं समझ सका कि वे क्या कह रहे थे।वे शाम को बहुत-सी चीजों के बारे में बात कर रहे थे और इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया।’


7-परंतु महात्मा गांधी ने कहा-‘इस निर्णय में मेरा कोई हिस्सा नहीं। रात्रि में नींद नहीं आ रही थी। अचानक मैंने अपने को जागा हुआ पाया और दिव्य का संदेश मिला कि मुझे लंबे उपवास पर चले जाना चाहिए।’ परंतु किसलिए? तब फिर वे सारे कारण खोजते हैं। वे कारण बाद में जोड़े जाते हैं।इसीलिए बौद्धिक ...एयर एलिमेंट का व्यक्ति सामान्यतया कभी सक्रिय नहीं होता। वह हो ही नहीं सकता, क्योंकि जब तक वह निर्णय ले, क्षण गुजर जाता है। जब वह सोच रहा होता है, तो वह क्षण गुजर रहा होता है। जब वह किसी निर्णय पर पहुंचता है, तब समय बीत जाने के कारण वह निर्णय बेकार हो जाता है। जब निर्णय लेने का क्षण था, तब वह नहीं ले सका। अतः वह सक्रिय नहीं हो सकता। और यह संसार का एक बड़ा दुर्भाग्य है कि जो सोच सकते हैं, वे क्रियाशील नहीं हो सकते, और जो क्रियाशील हो सकते हैं वे सोच नहीं सकते। यह एक मूल दुर्भाग्य है, और यह अपरिहार्य स्थिति है।


8-सदैव पता लगाएं कि आपकी क्रियाएं या प्रतिक्रियाएं क्या हैं, वे कहां शुरू होती है? प्रारंभिक बिंदु ही तय करेगा कि सर्वाधिक प्रभुत्व किसका है। यह जो जानने वालों का ..एयर एलिमेंट टाइप है, यह बहुत ही कम लोगों का है.. 28 प्रतिशत। उनके लिए सब कुछ जानने से शुरू होता है। भावना उसके पीछे आएगी, और तब क्रिया -जानना, भावना, कर्म। वह चूक सकता है, किंतु वह इससे भिन्न नहीं हो सकता। वह सबसे पहले सोचेगा।एक जो कि भावना-प्रधान..वॉटर एलिमेंट है, वह सर्वप्रथम महसूस करेगा, और फिर वह सारे कारण इकट्ठे करेगा। तर्क द्वितीय होंगे, वह पहले अनुभव करेगा। वह आपको देखता है और अपने हृदय में निर्णय कर लेता है कि आप अच्छे हैं या बुरे हैं। यह निर्णय भावना का निर्णय है। वह आपके बारे में कुछ भी नहीं जानता, किंतु वह पहली दृष्टि में ही निर्णय कर लेगा। वह अनुभव करेगा कि आप अच्छे व्यक्ति हैं या बुरे व्यक्ति हैं और फिर बाद में वह कारण इकट्ठे करता चला जाएगा।जो कुछ भी उसने पहले तय किया है उसके लिए। भावना-प्रधान निर्णय पहले करता है, तब कारण आते हैं, तब वह तर्क करता है। 9-इसलिए स्वयं में देखें कि क्या आप एक व्यक्ति को देखते ही पहले निर्णय करते हैं। देखें कि क्या पहले से ही आप आश्वस्त हो जाते हैं कि वह अच्छा है या वह बुरा है, प्रेम-पूर्ण है या अप्रेमपूर्ण है-और फिर बाद में कारण निर्मित करते हैं-और फिर आप अपने को भरोसा दिलाते हैं कि ‘ठीक है, मैं सही था, वह व्यक्ति अच्छा है क्योंकि ये-ये कारण हैं। मैंने पता लगा लिया। मैंने दूसरों से बात कर ली है। अब मैं कह सकता हूं कि वह अच्छा है।’परंतु ‘वह अच्छा है’, यह निष्पत्ति पहले से ही थी। अतएव भावना-प्रधान टाइप के लिए तर्क की व्यवस्था उलटी होती हैः निष्पत्ति पहले आती है और प्रक्रिया फिर बाद में। बुद्धि-प्रधान टाइप के लिए, निष्पत्ति कभी पहले नहीं आती। प्रक्रिया पहले होती है, निष्पत्ति अंत में। इसलिए अपने लिए खोजते चले जाएं। आपका चीजों को तय करने का क्या ढंग है? कर्म-प्रधान टाइप... फायर एलिमेंट के लिए कर्म पहले है। वह एक क्षण में कर्म करने का निर्णय करता है, तब वह महसूस करना प्रारंभ करता है, और तब अंत में वह कारण निर्मित करता है। 10-उदाहरण के लिए,महात्मा गांधी क्रियाशील व्यक्ति हैं। वे पहले निर्णय करते हैं। इसलिए वे कहेंगे, ‘यह मेरा निर्णय नहीं है। परमात्मा ने ही मुझसे यह निर्णय कराया है।’ सचमुच कर्म उनमें इतनी जल्दी आता है, बिना किसी प्रक्रिया के कि वे कह ही नहीं सकते कि ‘मैंने निश्चय किया है।’ एक भावना-प्रधान सदैव कहेगा, ‘मैं ऐसा महसूस करता हूं।’ परंतु कर्म-प्रधान व्यक्ति ...फायर एलिमेंट एक मोहम्मद साहब , एक महात्मा गांधी-वे सदैव कहेंगे ‘न तो मुझे महसूस होता है, और न मैंने सोचा है। यह निर्णय मेरे भीतर कहीं से आया है।यदि वह परमात्मा में विश्वास नहीं करता, तो वह कहेगा-‘कहीं से भी नहीं। यह निर्णय मेरे भीतर ही उठा है; मैं नहीं जानता कि कहां से आया है!’यदि वह परमात्मा में विश्वास करता है, तो परमात्मा निर्णायक बन जाता है। तब सब कुछ ‘वह’ कहता है और महात्मा गांधी करते चले जाते हैं। इसलिए महात्मा गांधी कह सकते हैं ‘केवल मैंने गलती की, किंतु निर्णय मेरा नहीं था।’ वे कह सकते हैं, हो सकता है मैंने संदेश को ठीक-ठीक नहीं समझा हो। मैं वहां तक नहीं गया जहां तक मुझे जाना चाहिए था। किंतु निर्णय तो परमात्मा का ही था। मुझे तो सिर्फ करना था। मुझे तो सिर्फ समर्पण करना था और अनुकरण करना था।’ एक मोहम्मद साहब के लिए, एक महात्मा गांधी के लिए यही रास्ता है। 11-जब आप नहीं जानते कि आपका टाइप क्या है, तो बेकार ही आप उन आयामों, उन दिशाओं में चलते चले जाएंगे, जहां कि आपको नहीं जाना है। जब आप अपना टाइप जानते हैं, तब आप जानते हैं कि आपको अपने साथ क्या करना है, कैसे करना है, कहां से प्रारंभ करना है।उदाहरण के लिए, एक फायर एलिमेंट का व्यक्ति अपने से विपरीत को बहुत आसानी से कर सकता है। यह बड़ी सरलता से विश्राम कर सकता है।महात्मा गांधी का विश्राम बड़ा विस्मयकारी था। वे कहीं भी विश्राम में चले जाते थे। यह बड़ा विरोधाभासी लगता है कि एक सक्रिय व्यक्ति को तो इतना तनावपूर्ण होना चाहिए कि वह आराम कर ही न सके। किंतु यह बात नहीं है। केवल फायर एलिमेंट ही बड़ी आसानी से विश्राम में जा सकते हैं। विचारशील एयर एलिमेंट इतने आसानी से विश्राम में नहीं जा सकते, एक भाव-प्रधान... वॉटर एलिमेंट तो और भी कठिन पाते हैं विश्राम में जाना। किंतु एक एक्टिव टाइप बड़ी आसानी से विश्राम में जा सकते हैं। 12-वास्तव में, आप जो भी टाइप हो, आप उसके विपरीत में बड़ी सरलता से जा सकते हो। यदि आप आसानी से विश्राम कर सकते हो, तो आप एक्टिव (क्रियाशील) टाइप के हैं। यदि आप निर्विचार में बड़ी आसानी से जा सकते हों, तो फिर आप थिंकिंग (विचारशील) टाइप के हैं। यदि आप निर्भाव में, (नान-फीलिंग में) आसानी से जा सकते हों, तो फिर आप वॉटर एलिमेंट (भावपूर्ण) टाइप के हैं।और यह बड़ी विचित्रता है क्योंकि साधारणतः हम सोचते हैं कि एक भावनापूर्ण व्यक्ति कैसे निर्भाव में जा सकता है? एक विचारशील व्यक्ति कैसे निर्विचार में जा सकता है! एक सक्रिय व्यक्ति कैसे अक्रिया में प्रवेश कर सकता है! किंतु विरोधी यह सिर्फ लगता है, है नहीं। यह एक आधारभूत नियम है कि विपरीत साथ-साथ होते हैं, वे एक ही होते हैं, दो अतियां एक दूसरे की ही होती है, जैसे कि बड़ी घड़ी का पेंडुलम होता है जो कि पहले अंतिम छोर तक बाएं जाता है, और फिर अंतिम छोर तक दाएं जाता है। और जब वह दाएं की अंतिम सीमा पर पहुंच गया होता है, तो वह बाएं की ओर यात्रा शुरू करता है। जब वह दाएं जा रहा होता है, तो वह बाएं की ओर जाने के लिए वेग अर्जित कर रहा होता है। जब वह बाएं जा रहा होता है, तब ऐसा दिखलाई पड़ता है कि वह बाएं जा रहा है, किंतु वह दाएं जाने की तैयारी कर रहा होता है। इसलिए विपरीत सदा आसान है। 13-स्मरण रखें, यदि आप आसानी से विश्राम कर सकते हैं, तो आप सक्रिय टाइप के हैं। यदि आप आसानी से ध्यान कर सकें, तो आप विचारशील टाइप के व्यक्ति हैं।जिन्होंने भी गहराई से सोचा है, उन्होंने हमेशा ही कहा है-‘निर्विचार में चले जाओ।’ क्योंकि यह उनके लिए इतना आसान है। इसीलिए एक बुद्ध ध्यान में इतने गहरे जा सकते हैंः इसलिए महात्मा गांधी इतनी सरलता से विश्राम में जा सकते हैं।उदाहरण के लिए एक कार-दुर्घटना हो गई थी, और महात्मा गांधी के दोपहर के सोने का समय हो गया था। किंतु जहां उन्हें जाना था, कार वहां नहीं पहुंच सकती थी, इसलिए उन्हें ठहरना पड़ा। वह बड़ी घातक दुर्घटना थी। प्रत्येक बहुत डर गया था। किंतु यह उनका दोपहर का सोने का समय है, अतः वे सो जाते हैं। जब दूसरी कार आती है, तो उन्हें सोया हुआ पाती है!और एक फीलिंग टाइट.. वॉटर एलिमेंट (भावपूर्ण) निर्भाव में आसानी से जा सकता है। उदाहरण के लिए, मीरा, चैतन्य महाप्रभु , वे भावपूर्ण टाइप के हैं। इतनी अधिक भावना है कि वे कुछ व्यक्तियों को ही प्रेम करके नहीं रह सकते, या कुछ थोड़ी-सी चीजों से ही प्रेम नहीं कर सकते। उन्हें तो सारे संसार को प्रेम करना पड़ेगा। वे सीमित प्रेम में नहीं रह सकते। प्रेम असीमित होना चाहिए। वह तो अनंत तक, असीम तक फैल जाना चाहिए। 14-चैतन्य महाप्रभु को अपनी ही तरह से ज्ञान उपलब्ध हुआ था। उनका नाम सारे बंगाल में प्रसिद्ध हो गया था। और तब वे एक दिन गुरु , एक वेदांत के शिक्षक के पास। उन्होंने उसके चरणों में सिर रख दिया। वह शिक्षक तो डर गया, भयभीत हो गया, क्योंकि वह चैतन्य को इतना अधिक आदर देता था। और उसने कहा-‘तुम मेरे पास क्यों आए हो? तुम क्या चाहते हो? तुमने स्वयं को जान लिया है। मैं तो तुम्हें कुछ भी नहीं सिखा सकता।’ चैतन्य ने कहा-‘अब मैं वैराग्य में उतरना चाहता हूं। मेरा जीवन एक भावपूर्ण जीवन रहा है, अब मैं निर्भाव में उतरना चाहता हूं, इसलिए मेरी सहायता करो।’ एक भावपूर्ण टाइप का व्यक्ति जा सकता है निर्भाव में; और चैतन्य गए थे।रामकृष्ण एक भावपूर्ण टाइप के व्यक्ति थे। अंत में वे वेदांत में चले गए। सारी जिंदगी वे एक पुजारी रहे, मां के अनन्य भक्त और आखिर में, वे एक वेदांत के शिक्षक तोतापुरी के शिष्य हो गए, जिन्होंने कि उन्हें निर्भाव की दीक्षा दी। और बहुत से लोगों ने तोतापुरी से कहा-‘कैसे आप इस व्यक्ति, रामकृष्ण को दीक्षित करेंगे? यह तो बड़ा भावनापूर्ण है! इसके लिए तो प्रेम ही सब कुछ है। यह प्रार्थना कर सकता है, यह पूजा कर सकता है, यह नृत्य कर सकता है, यह आनंद में डूब सकता है। किंतु यह निर्भाव में नहीं जा सकता। यह भावना से परे के प्रदेश में यात्रा नहीं कर सकता!’ 15-तोतापुरी ने कहा-‘जैसा आपने बताया वैसा यह है, इसीलिए यह जा सकता है और मैं इसे दीक्षित करूंगा। तुम नहीं जा सकते; लेकिन वह जा सकता है।’ इसलिए यह दूसरी कसौटी है कि कैसे तय करेंः यदि आप विपरीत में यात्रा कर सकते हैं, तो आप उस टाइप के व्यक्ति हैं। देखें कि प्रारंभ क्या है और फिर विपरीत की यात्राः ये दो बातें हैं। और लगातार भीतर खोजते चले जाएं। केवल इक्कीस दिन, लगातार ये दो बातें नाट करेंः प्रथम, तुम किस तरह प्रतिक्रिया करते हो, क्या है प्रारंभ ,शुरुआत?। और फिर किस विपरीत में तुम आसानी से जा सकते हो। निर्विचार में? निर्भाव में? अक्रिया में? और इक्कीस दिन में आप अपनी टाइप समझ सकते हैं-‘जो सर्वोपरि है सब में।’दूसरी दो भी होंगी छायाओं की तरह, क्योंकि शुद्ध टाइप तो हो ही नहीं सकते। तीनों हिस्सों में होते हैं, किंतु एक ही दूसरों से अधिक महत्वपूर्ण होती है । और एक बार तुम्हें पता चल भर जाए कि तुम्हारा टाइप क्या है, तब तुम्हारा मार्ग बहुत सुगत व सरल हो जाएगा। तब फिर तुम्हें अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करनी पड़ेगी ,उन मार्गों पर अपनी शक्ति फिजूल ही नष्ट नहीं करनी पड़ेगी, जिससे कि तुम्हारा संबंध नहीं।


16-अतः अपना टाइप पता लगाना आधारभूत अनिवार्यता है अध्यात्म की खोज के लिए। अन्यथा आप बहुत-सी चीजें करते रह सकते हैं और केवल उलझन पैदा कर सकते हैं।गीता में श्रीकृष्ण का यही मतलब है कि स्वभाव /टाइप से जो कि तुम्हारी प्रकृति है।वे कहते हैं, अच्छा है अपने ही टाइप में असफल होकर मर जाना बजाय दूसरे के टाइप में सफल होने के। अच्छा है असफल हो जाना-असफल अपने स्वभाव में, बजाय किसी और के स्वभाव में सफल हो जाने के, क्योंकि वह सफलता एक बोझ होगी-एक खाली बोझ, एक मृत बोझ। और अपने स्वभाव के अनुसार सफल हो जाना भी अच्छा है, क्योंकि वह असफलता भी आपको समृद्ध कर जाएगी। आप उससे प्रौढ़ होंगे, आप उसके द्वारा बहुत कुछ जान जाएंगे, आप उसके कारण बहुत कुछ हो जाएंगे। इसलिए असफलता भी अच्छी है, यदि वह अपने निज के स्वभाव के अनुसार है तो।पता लगाएं कि आपका टाइप किस प्रकार का है या कौन-सा टाइप सर्वोपरि है। और फिर उस टाइप के अनुसार काम करना शुरू करें। तब कार्य करना सरल होगा और लक्षण निकट ही होगा।


.....SHIVOHAM.....