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क्या अपना टाइप/ एलिमेंट पता लगाना अध्यात्म की खोज के लिए आधारभूत अनिवार्यता है?

क्या हैं तीन मूल कैटेगरी ,तीन एलिमेंट के व्यक्ति ?- 20 FACTS;- 1-तीन मूल कैटेगरी हैं... बौद्धिक-जानने वाला...एयर एलिमेंट; भावनात्मक-भावपूर्ण... वॉटर एलिमेंट; तीसरा-सक्रिय (एक्टिव)...फायर एलिमेंट।बौद्धिक /इंटलेक्चुअल का मतलब है...जिसकी सच्ची, वास्तविक प्यास ‘जानने’ की है। वह जानने के लिए अपनी जान भी दे सकता है। कोई अभी विष पर काम कर रहा है, वह विष खा भी सकता है, मात्र यह जानने के लिए कि क्या होता है। हम सोच भी नहीं सकते। यह बड़ा मूर्खतापूर्ण लगता है, क्योंकि वह मर जाएगा। और ऐसे जानने का क्या अर्थ है, यदि आप मर ही जाएं! ऐसे ज्ञान से आप क्या करेंगे? किंतु बौद्धिक टाइप जानने को ,ज्ञान को जीवित रहने से, पहले रखता है। ‘जानना’ ही उसके लिए जीवन है, ‘न जानना’ ही उसके लिए मृत्यु है।उसके लिए यही आधारभूत है।उदाहरण के लिए सुकरात, गौतम बुद्ध आदि सब ज्ञान की, जानने की खोज में हैं।सुकरात कहते है कि एक अज्ञानी का जीवन जीने योग्य नहीं है। यदि तुम नहीं जानते कि जीवन क्या है, तो फिर यह अर्थहीन है।

2-हमारे लिए यह कथन कतई अर्थपूर्ण नहीं लगता है, क्योंकि हम जीते चले जाते हैं, और हम इस आवश्यकता को महसूस ही नहीं करते कि जानें कि जीवन क्या है। यह टाइप है जो कि जानने के लिए जीता है ...दर्शन को विकसित करता है। फिलॉसफी का मतलब होता है... ज्ञान का प्रेम-जानना।जानने वाला टाइप जानने से प्रारंभ करेगा; बिना जाने कभी निर्णय नहीं लेगा। और कोई पक्ष नहीं लेगा, जब तक कि सारे कारण व नतीजे नहीं जान लिए जाते हैं। ऐसे टाइप के लोग वैज्ञानिक बनते हैं। ऐसे टाइप के लोग पूर्णतः निष्पक्ष दार्शनिक, वैज्ञानिक निरीक्षक बन सकते हैं।दूसरा टाइप भावना का है-इमोटिव.... वॉटर एलिमेंट। ज्ञान पाना उनके लिए अर्थहीन है, जब तक कि कोई अनुभव न हो। कुछ भी उसके लिए तभी अर्थपूर्ण है जबकि कोई उसे महसूस भी करे। ‘अनुभव अवश्य हो।’ उनके लिए अनुभूति और भी अधिक गहरे केंद्र से-हृदय से है। जानना पहले केंद्र से जुड़ा है-बुद्धि से। अनुभव करना चाहिए-‘वन मस्ट फील’-कवि इस कैटेगरी (कोटि) से संबंधित है। चित्रकार, नर्तक, संगीतकार-इनके लिए जानना पर्याप्त नहीं है। यह बहुत रूखा है- हृदयरहित, बिना अनुभूति के।

3-अतः एक बौद्धिक टाइप एक फूल को काट-पीट सकता है केवल जानने के लिए कि ‘वह क्या है’, किंतु एक कवि उसे चीर-फाड़ नहीं सकता, वह उसे प्रेम कर सकता है ,महसूस कर सकता है और वह जानता है, कि केवल अनुभूति के द्वारा ही वास्तविक जानना हो सकता है।अतः ऐसा हो सकता है कि एक वैज्ञानिक एक फूल के बारे में अधिक जानता हो, परंतु एक कवि मान ही नहीं सकता कि वह अधिक जानता है। एक कवि जानता है कि वह अधिक जानता है, और वह गहरे जानता है। एक वैज्ञानिक तो खाली परिचित है जबकि एक कवि कहता है-‘मैं उसकी आत्मा को जानता हूं।’यह एक भिन्न ही मार्ग है भावनात्मक टाइप का जो फीलिंग से, अनुभव से जानता है। बौद्धिक टाइप के लिए अनुभव करने के लिए उसे पहले जानना होता है। प्रथम वह जानता है, और तभी अनुभव कर पाता है। उसकी अनुभूति भी जानने के द्वारा होती है।कभी फूल खिल ही रहा है, कभी फूल जवान है और वह मूड भिन्न है। और कभी फूल बूड़ा हो गया है और मरने की प्रतीक्षा कर रहा है, और कभी फूल बहुत प्रसन्न है और उत्सव मना रहा है, और कभी फूल उदास है।

4-उसे फूलों के साथ निकटता से रहना होगा।उसे उसकी कितनी ही बहु चित्तदशाओं को अनुभव भी करना होगा।जानना होगा कि वह रात में कैसा अनुभव करता है, जब अंधेरा घिरा होता है; और सुबह जब सूरज निकला हो, तब उसे कैसा लगता है; और जब एक पक्षी उड़ता है और गीत गाता है, तब फूल कैसा महसूस करता है? उसे कैसा लगता है जब आंधी भरी हवाएं आती हैं; और तब कैसा लगता है, जब सब कुछ शांत होता है! उसे उसके स्वरूप की सारी स्थितियों में जानना होगा-बहुत निकट से-एक मित्र की तरह, एक साझीदार की तरह, एक गवाह की भांति उससे संबंधित होना पड़ेगा।फिर तीसरा टाइप हैः एक्टिव /सक्रिय/ सृजनात्मक टाइप ..... फायर एलिमेंट । वह जानने अथवा अनुभव के साथ नहीं होता। उसे तो सृजन करना होता है। वह जब तक कुछ सृजन नहीं कर लेता, वह उसे नहीं जान सकता। केवल सर्जक होकर ही वह ज्ञाता बन पाता है।यह तीसरा टाइप सक्रियता में, कर्म में जीता है।

5-कर्म के कितने ही आयाम संभव हैं, किंतु यह तीसरा टाइप कर्म-केंद्रित होता है। वह नहीं पूछता कि जीवन क्या है? जीवन का क्या अर्थ है? वह पूछेगा कि जीवन क्या करने के लिए है? क्या करना है, क्या बनाना है? यदि वह खुद निर्मित कर सके, तो वह आराम से है। उसके सृजन भिन्न-भिन्न हो सकते हैंः वह मनुष्यों का निर्माता हो सकता है। वह समाज का बनाने वाला हो सकता है। वह चित्र का बनाने वाला हो सकता है। किंतु सृजन वहां जरूर होगा।अतएव ये तीन शुद्ध आधारभूत टाइप हैं। परंतु कोई भी व्यक्ति शुद्ध टाइप नहीं है। यही कठिनाई है। कोई शुद्ध टाइप नहीं है, प्रत्येक घुलामिला है। और तीनों टाइप एक ही में समाहित हैं। अतः प्रश्न यह नहीं है कि आप किस टाइप के हैं? प्रश्न यह है कि कौन-सा टाइप सर्वाधिक बलवान है।कोई हो भी नहीं सकता, क्योंकि तीनों ही आपमें मौजूद हैं। यदि तीनों बराबर हैं, तो फिर आप में एक लयब