क्या हम अज्ञात धागों द्वारा चालित एक कठपुतली है? ध्यान में देवी-देवताओं के दर्शन का क्या अर्थ है?

क्या हम अज्ञात धागों द्वारा चालित एक कठपुतली है?-

06 FACTS;-

1-कभी-कभी हमे बहुत गहरे में ऐसा अनुभव होता है कि जैसे कोई अज्ञात शक्तियां हमारे विचारों तथा कृत्यों को नियंत्रित करती हैं।लगता है कि हम अज्ञात धागों द्वारा चालित एक कठपुतली है और क्षण -क्षण हमारी परीक्षा ली जा रही है। फिर भी हम इसके प्रति सजग नहीं है और सोचते है कि कहीं यह सब हमारे मन का खेल तो नहीं है!वास्तव में, यह कोई प्रश्न नहीं है, केवल तथ्य का कथन है और यह शुभ है।यदि तुम्हें सच में ऐसी प्रतीति हो रही है कि तुम अज्ञात शक्तियों के हाथ में हो, तो तुम नहीं हो।यही तो चाहिए कि तुम नहीं हो जाओ।लेकिन जब तुम्हें लगता है तुम एक कठपुतली की भांति हो, तो उसमें कुछ निंदा का भाव है। तुम्हें यह वाक्य अच्छा नहीं लगता ...'कठपुतली की भांति'! लेकिन फिर भी तुम तो हो ही।यदि वास्तव में ही तुम कठपुतली हो तो फिर कठपुतली की भांति कौन महसूस कर रहा है?कौन है वहां जो महसूस करे? तुम कठपुतली हो और बात खतम हो गई।इसलिए यह खयाल छोड़ दो कि तुम एक कठपुतली हो। सिर्फ अपने चारों ओर उपस्थित विराट की शक्तियों के प्रति सजग होओ।

2-वास्तव में,तुम कुछ भी नहीं हो, कठपुतली भी नहीं। तुम सिर्फ बहुत सी शक्तियों का एक मिलन बिंदु हो, सिर्फ एक चौराहा हो ...जहां से बहुत सी शक्तियां गुजरती हैं। और क्योंकि बहुत सी शक्तियां गुजरती हैं तो एक बिंदु बन जाता है।उदाहरण के लिए यदि तुम बहुत सी रेखाएं खींचो जो कि एक दूसरे को काटती हों तो एक बिंदु पैदा हो जायेगा। वह बिंदु ही तुम्हारा अहंकार बन जाता है, और तुम्हें प्रतीति होती है कि तुम हो।वास्तव में, तुम नहीं हो, केवल विराट है। तुम एक कठपुतली की भांति भी नहीं हो, वह भी अहंकार को एक नये रूप में बनाये रखना है। और चूंकि अहंकार अभी बना है, इसलिए इस परिस्थिति के प्रति एक निंदा का भाव महसूस होता है।आनंदित होओ कि तुम नहीं हो, क्योंकि तुम्हारे खोते ही, सारे दुख भी खो जाते हैं। अहंकार के विलीन होते ही फिर कोई नर्क नहीं है। तुम अपने आप से मुक्त हो गये। फिर केवल विराट की शक्तियां ही शेष बची जो हमेशा से क्रियाशील हैं। तुम तो कहीं भी नहीं हो, कठपुतली की भांति भी नहीं।यदि यह बात तुम्हारे भीतर चली जाये तो तुम उस सत्य तक पहुंच गये जहां कि सारे धर्म तुम्हें लाना चाहते हैं।तुमने अपने अंतिम केंद्र को छू लिया, अथार्त अपने अंतिम आधार पर पहुंच गये।

3-लेकिन यह कठिन है। शायद तुम कल्पना कर रहे हो या सच में तुम्हीं इसे गढ़ रहे हो।तुम सोच सकते हो, लेकिन सोचने से कुछ भी न होगा ...जब तक कि तुम इसे महसूस न करो, यह तुम्हारी प्रतीति न हो जाये। यह सिर्फ गहरे ध्यान से ही हो सकता है। केवल ध्यान में ही तुम उस बिंदु पर आ सकते हो जहां तुम्हें प्रतीति होती है कि ''सब कुछ हो रहा है और मैं कर्ता नहीं हूं। ''और केवल इतना ही नहीं कि ''मैं करने वाला नहीं हूं'', बल्कि तुम वहां हो ही नहीं और चीजें अवकाश में घटित हो रही हैं। तुम एक खाली स्थान हो गये हो, और वहां चीजें घट रही हैं, और तुम वहां नहीं हो।यह तभी हो सकता है जब तुम्हारे सारे विचार बंद हो जायें, और तुम्हारा अस्तित्व विचार के बादलों से रिक्त हो जाये।तब तुम उस शुद्ध अस्तित्व में होते हो और इसे महसूस कर सकते हो। लेकिन यदि तुम महसूस करते हो कि ऐसा हो रहा है तो यह एक अच्छा संकेत है।आगे बढ़ों... और इस कठपुतली को भी छोड़ दो, इसे लादे मत रहो। जब तुम ही नहीं हो तो फिर इस कठपुतली को क्यों ढोना ...उसे भी गिरा दो और अहंकार से पूरी तरह मुक्त हो जाओ।

4-तुम्हें पूर्णतया अहंकार से मुक्त होना है तो नाचो, गाओ, कूदो और एक पागल की भांति आनंद मनाओ। यदि तुम यह कर सको तो फिर अहंकार नहीं बच सकता, क्योंकि अहंकार सदा नियंत्रक की तरह जीता है। यदि तुम कुछ भी नियंत्रित न करो तो यह विलीन हो जाता है क्योकि यह नियंत्रण की रचना है। जब तुम नाचने लगते हो तो अहंकार कहता है।''यह तुम क्या कर रहे हो? तुम मूर्ख दिखलाई पड़ोगे। तुम्हारे जैसा बुद्धिमान व्यक्ति और जंगलियों की तरह नाच रहा है'' अहंकार कहेगा, ''ऐसा मत करो। अपने पर नियंत्रण रखो। '' यदि तुम नियंत्रण रख लेते हो तो अहंकार बना रहता है।अपने को पहली बार बिना नियंत्रण के केवल जीवंत छोड़ दो, और तुम्हें तत्काल पता चलेगा कि अहंकार नहीं बचा। अस्तित्व है, शक्तियां हैं, लेकिन अहंकार नहीं है। यदि तुम बिना नियंत्रण के जी सको तो तुमने बड़े से बड़ा अनुशासन उपलब्ध कर लिया है। यदि तुम अपने को नियंत्रित नहीं करते हो और फिर भी एक अनुशासन है, तो फिर यह अनुशासन तुम्हारा अपना नहीं है। यह अनुशासन उच्चतर स्रोत्रों से आता है। यदि तुम अपने को अनुशासित करते हो तो फिर तुम्हारे जीवन के तुम स्वयं ही स्रोत हो गये लेकिन विराट के स्रोत से टूट गये।इसीलिए स्वयं को पूरी तरह गिरा दो।

5-उदाहरण के लिए एक दिन एक सम्राट गौतम बुद्ध के पास आया; उसके एक हाथ में एक बहुत ही बहुमूल्य हीरा था, और दूसरे हाथ में एक कमल का फूल। उसने सोचा कि शायद गौतम बुद्ध को हीरा पसंद नहीं आये क्योंकि उन्होंने सब धन आदि त्याग दिया है, इसलिए वह दूसरे हाथ में कमल का फूल ले आया था, ताकि अवसर हाथ से न जाये।वह फूल भी दुर्लभ था, क्योंकि इस समय उसका मौसम न था, वह बेमौसम का फूल था। वह तो हीरा ही भेंट करना चाहता था। वह बहुत दुर्लभ हीरा था, केवल उसी के पास ऐसा हीरा था।वह गौतम बुद्ध को ऐसा हीरा भेंट करना चाहता था जो कोई और नहीं कर सकता ताकि सारे संसार में यह खबर फैल जायेगी कि इस सम्राट ने गौतम बुद्ध को इतना बहुमूल्य हीरा भेंट किया। गौतम बुद्ध तो एक बहाना थे। लेकिन शायद गौतम बुद्ध हीरा पसंद न करें, वे शायद स्वीकार न करें, इसलिए वह एक कमल का फूल भी लाया था।वह अपने दायें हाथ में हीरा लेकर गौतम बुद्ध के पास आया। गौतम बुद्ध ने उसे देखते ही कहा, ''गिरा दो।''

6-उस व्यक्ति ने समझा कि गौतम बुद्ध को पसंद नहीं आया, इसलिए उसने हीरा जमीन पर डाल दिया।फिर वह कमल का फूल अपने बायें हाथ में आगे लाया तो गौतम बुद्ध ने कहा, ''इसे भी गिरा दो।''अत: उसने उसे भी जमीन पर गिरा दिया। उसके बाद वह अपने दोनों खाली हाथों को जोड़ कर आया।गौतम बुद्ध ने तीसरी बार भी कहा, ''इसको भी गिरा दो।''अब तो उसके हाथ में कुछ गिराने को भी न था, अत: उसकी कुछ समझ में नहीं आया।गौतम बुद्ध ने कहा, ''सोचो मत, इसे भी गिरा दो!''तब अचानक उसकी समझ में आया कि गौतम बुद्ध हीरा या फूल गिराने के लिए नहीं कह रहे थे बल्कि इस अहंकार को गिराने के लिए कह रहे थे जो यह हीरा और फूल लाया था।वह गौतम बुद्ध के चरणों में गिर पड़ा, और गौतम बुद्ध ने सभा से कहा, ''यह व्यक्ति समझ वाला व्यक्ति है।''जब वह व्यक्ति खड़ा हुआ तो वह दूसरा ही व्यक्ति था, बिलकुल ही भिन्न। पुराना विलीन हो गया था। जो व्यक्ति गौतम बुद्ध के चरणों में गिरा था, वह वहां नहीं था, एक नया ही व्यक्ति सामने था।अहंकार...बदल गया था। ध्यान में देवी-देवताओं के दर्शन का क्या अर्थ है?-

09 FACTS;-

1-क्या पौराणिक देवी देबताओं, का किसी तल पर वास्तय में आस्तित्व है या ये सिर्फ एक प्रतीक हैं ?और यदि वे सिर्फ प्रतीक ही हैं तो लोग ध्यान में उनके दर्शन कैसे करते हैं और ऐसे देवी देवताओं के दर्शन का क्या अर्थ है?वास्तव में, वे कोई इतिहास नहीं हैं, उनका वस्तुगत वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।लेकिन इसका यह अर्थ भी नहीं है कि उनका वास्तविकता से कोई लेना -देना नहीं है।उनका आत्मगत वास्तविकता से संबंध है।देवी -देवता ये पौराणिक प्रतीक, इनका तुम्‍हारे बाहर कोई आस्‍तित्‍व नहीं है। लेकिन इनका मनोवैज्ञानिक अस्तिस्व है, उसका उपयोग किया जा सकता है।अस्तित्व सहायक हो सकता है। इसलिए.. पहली बात जो कि समझने योग्य है वह यह कि वे कोई वास्तविक व्‍यक्ति नहीं हैं जो कि इस जगत में रहते हो, लेकिन मनुष्य के चित्त के वास्तविक प्रतीक हैं।

2-तुम्हारा अंतर्मन किसी खास अवस्था में कुछ विशेष चीजें अभिव्यक्त करता है। यदि मन की स्थिति बदल जाती है तो तुम्हारे स्वप्न भी बदल जायेंगे, तुम्हारी अभिव्यक्तियां भी बदल जायेंगी।एक व्‍यक्ति जो कि सीजोफ्रेनिक है, खंड -खंड बंटा है, टूटा हुआ है, वह कु्छ विशेष चीजें बनायेगा, और वे चीजें एक विशेष ढांचा लिए हुए होंगी। सभी खंडित मानसिकता के लोग कुछ विशेष चीजें बनायेंगे, और उन सबका ढांचा वही होगा। और जब वे रोगमुक्त हो जायेंगे, स्‍वस्‍थ हो जायेंगे तो वे बिलकुल भिन्न चित्र बनायेंगे और यह बात प्रत्येक मरीज के साथ होगी।तब वह ऐसे चित्र बनाता है जैसे कि मंडल /वर्तुल की तरह के चित्र बनाता है। वह Circle उसके भीतर के मंडल/Circle से गहरे में संबंधित है जो कि पुन: उपलब्ध कर लिया गया है। अब भीतर भी वह एक Circle हो गया है ...वह एक हो गया है।सिर्फ उनके चित्रों को देखकर ही तुम कह सकते हो कि मरीज बीमार है या नहीं।

हिंदू पौराणिक देवी-देवता एक विशेष मनोदशा के विशेष स्वप्न हैं। जब तुम उस मनोदशा में होते हो, तो तुमको वैसे स्वप्न दिखलाई पड़ने लगते हैं।सारे संसार में उनमें एक प्रकार की समानता होगी।थोड़ी बहुत भिन्नता संस्कृति, शिक्षा, प्रशिक्षण आदि के कारण होगी, लेकिन गहरे में उनमें समानता होगी।

3-उदाहरण के लिए मंडल/Circle एक पौराणिक प्रतीक है। सारे संसार में यह बार -बार आता रहा है। प्राचीन ईसाई चित्रों में, पुराने तिब्बती चित्रों आदि में भी यह है। चीनी, जापानी तथा भारतीय कला में भी मंडल का एक आकर्षण रहा है। किसी भी तरह जब तुम्हारी अंतर्दृष्टि वर्तुलाकार हो जाती है, जब एक धारा की तरह हो जाती है, अखंड, अविभाजित हो जाती है, तो तुम अपने स्वप्न में वर्तुल देखने लगते हो। यह वर्तुल तुम्हारी वास्तविकता को बताता है।इसी तरह सभी प्रतीक व्यक्तिगत सत्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।और यदि कोई समाज किसी देवता को कोई विशेष रूप देता है तो यह साधक के लिए बहुत सहायक सिद्ध होता है, क्योंकि अब वह बहुत से आंतरिक स्वप्न -दर्शनों को समझ सकता है।फ्रायड ने सपनों की व्याख्या करके पश्चिम में एक नये युग का प्रारंभ किया। फ्रायड के पहले पश्चिम में कोई भी सपनों में दिलचस्पी नहीं रखता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि सपनों का भी कुछ अर्थ हो सकता है या कि सपनों की भी अपनी कुछ वास्तविकता हो सकती है या कि उनके पास भी कोई गुप्त कुंजियां हो सकती हैं जो कि मनुष्य के व्यक्तित्व को खोल सकती हैं।

4-लेकिन भारत में हम सदा से सपनों की व्याख्या करते रहे हैं और केवल सपने ही नहीं, क्योंकि सपने तो साधारण हैं, हम दर्शनों की भी व्याख्या करते रहे हैं। दर्शन उन लोगों के सपने हैं जो कि ध्यान कर रहे हैं और अपनी चेतना को रूपांतरित कर रहे हैं। वे भी सपने ही हैं। सामान्य चेतना में सपने घटित होते हैं। और अब फ्रायड के मनोविज्ञान से यह निष्कर्ष निकला है कि विशेष प्रकार के सपने एक विशेष अर्थ रखते हैं।उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति लगातार सपनों में देखता है कि वह आसमान में उड़ रहा है, कि वह पक्षी हो गया है। वह उड़ता रहता है पहाड़ों पर, नदियों पर, शहरों पर, वह उड़ता ही चला जाता है। फ्रायड कहता है कि इस प्रकार का सपना, उड़ने का सपना, ऐसे चित्त को आता है जो कि बहुत महत्वाकांक्षी है। महत्वाकाक्षा सपने में उड़ना बन जाती है। तुम सबके ऊपर उठ जाना चाहते हो ...पहाड़ों से भी ऊपर। यदि तुम उड़ सको तो तुम सबके ऊपर हो जाओगे। महत्वाकांक्षा सबके ऊपर उड़ने का प्रयत्न है। सपने में महत्वाकांक्षा उड़ने का एक चित्रमय रूप ले लेती है।

5-जब तुम ध्यान में प्रवेश करते हो, तुम चेतना की भिन्न दशा में प्रवेश कर रहे हो ..तुम्हें खास तरह के दर्शन होने लगेंगे। वे भी सपने ही हैं, लेकिन हम उन्हें दर्शन कहते हैं, क्योंकि वे सामान्य नहीं हैं। जब तक ध्यान में तुम एक विशेष दशा तक नहीं पहुंच जाते, वे घटित नहीं होंगे। वे बताते हैं कि भीतर कुछ घटित हो रहा है। वे तुम्हारी आंतरिक वास्तविकताओं को मन के पर्दे पर चित्रमय ढंग से प्रक्षेपित करते हैं।स्मरण रहे कि तुम्हारा अचेतन मन कोई भाषा नहीं जानता। तुम्हारा अचेतन मन केवल अति प्राचीन भाषा जानता है ...चित्रों की भाषा। तुम्हारे चेतन मन ने भाषा के संकेत सीख लिए हैं, लेकिन अचेतन अभी भी चित्रों की ही भाषा जानता है जैसे कि एक छोटे बच्चे का मन होता है। वह सभी चीजों को चित्रों में बदल लेता है।उदाहरण के लिए शिवलिंग के बहुत से अर्थ होते हैं।यह जीवन ऊर्जा का मूल स्रोत है।शिवलिंग अंडे के आकार का होता है ...सफेद व अंडाकार। ऐसा ध्यान की विशेष स्थिति में होता है कि यह तुम्हारे सामने एक सफेद अंडाकार वस्तु प्रकाश से परिपूर्ण प्रगट होता है।

6-प्रकाश उसमें से बाहर निकलता होता है, किरणें बाहर की ओर फूटती रहती हैं।जब भी तुम भीतर गहरे में, शांत व शीतल हो जाते हो, तो यह प्रतीक प्रकट होता है। इसीलिए पौराणिक कथाओं में शिव हिमालय पर रहते हैं जो कि संसार की सर्वाधिक ठंडी जगह है, जहां सब शीतल है। एक संगमरमर के शिवलिंग की ओर सिर्फ उसकी ओर देखने भर से तुम्हें अपने भीतर एक शीतलता मालूम होगी। इसीलिए शिवलिंग के ऊपर एक मटका रखा रहता है, और उस मटके से सतत पानी की बूंदें शिवलिंग पर पड़ती रहती हैं। यह सिर्फ उसे शीतल रखने के लिए है। ये सारे प्रतीक हैं तुम्हें शीतलता का भाव देने के लिए।कश्मीर में एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो कि अपने आप उभरता है जब बर्फ गिरती है। यह बर्फ का शिवलिंग है।अमरनाथ गुफा में बर्फ पड़ने से यह शिवलिंग निर्मित हो जाता है।

7-वह शिवलिंग ध्यान के लिए श्रेष्ठतम है क्योंकि वह चारों तरफ से इतना ठंडा है कि वह उस आंतरिक घटना की झलक देता है।जब तुम्हारे भीतर, तुम्हारी चेतना में शिवलिंग प्रकट होता है, तब वह एक प्रतीक, एक दर्शन बनता है।ये प्रतीक सदियों की मेहनत और प्रयास से खोजे गये हैं। वे मन की एक विशेष दशा की ओर इशारा करते हैं। सभी पौराणिक देवी-देवता व्यक्तिगत रूप से अर्थपूर्ण हैं। बाहर वे कहीं भी नहीं पाये जाते। और यदि तुम उन्हें बाहर पाने का प्रयास करो तो तुम अपनी ही कल्पना के शिकार हो जाओगे। क्योंकि तुम उन्हें पा भी सकते हो।मनुष्य की कल्पना इतनी शक्तिशाली है,कि यदि तुम सतत किसी चीज की कल्पना करो तो तुम उसे अपने चारों ओर अनुभव कर सकते हो। तब तुम उसे देख भी सकते हो, तब तुम उसे पा भी सकते हो। वह एक वस्तु की तरह हो जायेगा।लेकिन वह वस्तु की तरह नहीं है , फिर भी तुम उसे अपने बाहर अनुभव कर सकते हो। इसलिए कल्पना के साथ खेलना खतरनाक है, क्योंकि तब तुम अपनी ही कल्पना से सम्मोहित हो सकते हो, और तुम ऐसी चीजें देख और महसूस कर सकते हो जो कि वास्तव में नहीं हैं।

8-तुम श्रीकृष्ण को ,क्राइस्ट को या गौतम बुद्ध को देख सकते हो, लेकिन यह सारी मेहनत बेकार है क्योंकि तुम सपने देख रहे हो न कि सत्य।यह एक अपनी निजी कल्पना निर्मित करना है, एक सपनों का संसार बनाना है। ये पौराणिक आकृतियां सिर्फ प्रतीक हैं ,अर्थपूर्ण हैं, काव्यात्मक हैं...उनकी अपनी एक भाषा है। वे कुछ कहती हैं, उनका कुछ अर्थ है, किंतु वे कोई वास्तविक व्यक्तित्व नहीं हैं। यदि तुम इस बात को स्मरण रख सको तो तुम उनका सुंदरता से उपयोग कर सकते हो। वे बहुत सहायक सिद्ध हो सकते हैं। किंतु यदि तुम उन्हें वास्तविक की तरह सोचते हो तो फिर वे हानिकारक सिद्ध होंगे, और धीरे-धीरे तुम एक स्वलोक में चले जाओगे और तुम वास्तविकता से संबंध खो दोगे। और वास्तविकता से संबंध खोने का अर्थ है विक्षिप्त हो जाना।

9-हमें सदा वास्तविकता से संबंध बनाये रखना चाहिए । भीतर के जगत में सजग तथा सचेत रहो, लेकिन उन दोनों को मत मिलाओ।यह हो रहा है या तो हम बाहरी वस्तुगत सत्य को भीतर की आत्मगत वास्तविकता को नष्ट करने देते हैं, अथवा हम आत्मगत सत्य को वस्तुगत वास्तविकता पर प्रक्षेपित कर देते हैं, और तब वस्तुगत खो जाता है। ये दो अतियां हैं।विज्ञान वस्तुगत के बारे में सोचता रहता है और सब्जेक्टिव को, आत्मगत को इनकार करता रहता है, और धर्म आत्मगत की बात करता रहता है और वस्तुगत को इनकार करता रहता है।लेकिन वस्तुगत वस्तुगत है और उसे वस्तुगत ही रहने दो, और आत्मगत आत्मगत है, उसे आत्मगत ही रहने दो। उन दोनों की शुद्धता बनाये रखो, और तुम ऐसा करके पहले से अधिक बुद्धिमान रहोगे। यदि तुम उन्हें मिला दोगे, यदि तुम उनमें भ्रम पैदा कर लोगे तो तुम विक्षिप्त हो जाओगे, तुम्हारा संतुलन डगमगा जायेगा।

ध्यान में देवी-देवताओं के दर्शन का अर्थ ;-

सपना देखना एक आम बात है, हम सबको नींद में अक्सर सपने देखते हैं। एक ध्यानी के हर सपने का कोई न कोई मायने जरूर होते हैं। सपने वर्तमान और भविष्य की जानकारी देते हैं और उससे संबंधित संभावनाओं के बारे में बताते हैं।सर्प कुंडलिनी शक्तियों का भी प्रतिनिधित्‍व करते हैं। अगर सर्प आपके स्‍वप्‍न में आया है तो इसका अर्थ है कि आपकी आध्‍यात्मिक साधना की शक्तियां जागृत होकर मूलाधार चक्र से ऊपर की ओर बढ़ रही हैं। इसका अर्थ है कि आपकी रचनात्‍मकता बढ़कर तरक्‍की की ओर अग्रसर हो चुकी है।सांप के सपने की व्याख्या अलग-अलग संस्कृतियों में वृहद रूप से की गई है। अगर आपको सपने में सांप दिखाई देता है तो यह इस ओर इशारा करता है कि निकट भविष्य में आप समस्याओं से घिरने वाले हैं।सपने में सांप का डंसना किसी गंभीर रोग के होने का सूचक है। सपने में सांप के दांत दिखाई देने का मतलब है कि आपको धोखा मिल सकता है।सपने में सांप यदि मंदिर में दिखाई दे तो इसका मतलब आपकी मनोकामनाएं भविष्य में पूर्ण होने वाली हैं। सांप पेड़ पर चढ़ता हुआ दिखाई दे तो आपको भविष्य में रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। सपने में सांप शिवलिंग पर लिपटे देखने का मतलब है कि आपके ऊपर भगवान शिव की कृपा बनी हुई है जिससे आपको सभी कार्यों में सफलता हासिल होगी।वहीं सफेद सांप का देखना और उसका काटना शुभ माना जाता है। इससे ढेर सारे धन की प्राप्ति होती है।कुछ प्रमुख देवी-देवताओं को सपने में देखने का संकेत होता है…

1-सपने में देवी दुर्गा को देखना ;-

स्वपनशास्त्र के अनुसार, सपने में देवी दुर्गा का दिखना बहुत शुभ माना जाता है।लेकिन इस बात का भी ध्यान देना आवश्यक होता है कि मां दुर्गा ने आपको किस मुद्रा में दर्शन दिए हैं।अगर देवी दुर्गा लाल वस्त्रों में मुस्काराती हुई दिखें तो समझ जाएं कि आपकी जिंदगी में सबकुछ अच्छा होने वाला है। आपको हर क्षेत्र में कामयाबी मिलेगी। साथ ही पुराने रोगों से आपको निजात मिलेगी और जल्द आपको कोई शुभ समाचार भी मिलने वाला है।सपने में मां दुर्गा की मूर्ति के दर्शन करना भी बहुत शुभ माना जाता है।यदि आप सपने में मां दुर्गा को शेर पर सवार देखते हैं तो इसका भी अर्थ होता है कि जल्दी ही आपके जीवन की समस्याओं का अंत होने जा रहा है। तो वहीं अगर आप मां दुर्गा के शेर को क्रोधित मुद्रा में और दहाड़ते हुए देखते हैं तो यह आने वाली समस्याओं का संकेत करता है। इसलिए पहले ही सावधान हो जाना चाहिए।यदि आपने सपने में मां दुर्गा को क्रोधित मुद्रा में देखा है तो यह स्वप्न शुभ नहीं माना जाता है। इसका अर्थ माना जाता है कि आप कुछ न कुछ ऐसा कार्य या गलती कर रहे हैं। ऐसा सपना दिखाई देने पर आपको अपने व्यवहार व कार्य पर ध्यान देना चाहिए व कुछ गलत करने की अहसास होने पर उसे सुधारने के प्रयास करने चाहिए।

2-सपने में शिवलिंग देखना ;-

भगवान शिव को देवों के देव का दर्जा प्राप्त है इसलिए उनको महादेव कहा जाता है। अगर सपने में आपको शिवलिंग नजर आ जाए तो यह शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके सभी शत्रुओं से मुक्ति मिलेगी और आपका बुरा चाहने वालों के इरादे सफल नहीं हो पाएंगे। साथ ही आपको हर परेशानी से मुक्ति मिलेगी और आपकी उन्नति का समय शुरू होने वाला है।

यदि सपने में आप साकार रुप में भगवान शिव को देखते हैं तो यह सपना आपके बुरे वक्त के जाने का और अच्छी समय आने का संकेत माना जाता है। यदि आप ऐसा स्वप्न देखते हैं तो प्रातः उठकर सबसे पहले स्नानादि करने के पश्चात शिव मंदिर जाकर दर्शन करने चाहिए।लेकिन यदि आपको सपने में टूटा हुआ शिवलिंग दिखाई पड़े तो यह बहुत अशुभ माना जाता है।

आपका बनता काम बिगड़ने वाला है और आपके जीवन में मुसीबत आने का इशारा है।इससे बचने का उपाय यह है कि अब रोजाना शिवजी के मंदिर में जाकर उनका पूजन करें और दीपक जलाएं। ऐसा करने से मुसीबत कुछ कम हो जाती है।

3-सपने में भगवान श्रीकृष्ण को देखना ;-

सपने में श्रीकृष्ण का दिखाई देना शुभ सूचक माना जाता है। इसका मतलब होता है कि आपकी जिंदगी में कोई ऐसा व्यक्ति आने वाला है, जो आपको अच्छी तरह से समझेगा और आपकी समस्याओं में हर वक्त साथ रहेगा। सपने में कृष्ण भगवान का दिखना समृद्धि के तौर पर माना जाता है। इससे राजयोग भी बनता है और आप जिस क्षेत्र में काम करते हैं उसमें आपको निश्चित ही सफलता मिलेगी।आपके जीवन में प्रेम का आगमन होने वाला है चाहें वह मित्रता, रिश्ता या अन्य किसी भी रुप में हो। यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो ऐसा सपना बहुत ही शुभ माना जाता है। यह सपना प्रेम संबंध में सफलता प्राप्त होने का संकेत देता है।

4-सपने में भगवान श्रीराम को देखना ;-

सपने में अगर आपने भगवान राम को देखा है तो इसका अर्थ है आपको कोई बड़ी सफलता मिलने वाली है। अगर आप किन्हीं परेशानियों में फंसे हुए हैं तो वह सब जल्द ही खत्म होने वाली हैं और आपको राहत मिलेगी। साथ ही आपकी तरक्की के मार्ग खुलने वाले हैं और माता-पिता के साथ आपके संबंध मधुर होंगे । भगवान राम को मर्यादा पुरोषत्तम कहा जाता है। यदि आपको सपने में भगवान श्री राम दिखाई देते हैं तो इसका अर्थ माना जाता है कि आपको अपने जीवन में तरक्की के अवसर प्राप्त होंगे लेकिन यह इस बात का संकेत भी होता है कि आपको अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही प्रकार से करना चाहिए।

5-सपने में भगवान गणेश को देखना ;-

स्वपनशास्त्र के अनुसार, सपने में अगर आपने भगवान गणेश को देखा है तो आपको हर विघ्न अर्थात परेशानियों से मुक्ति मिलने वाली है। आपकी जिंदगी में सब शुभ ही शुभ होने वाला है। घर में सुख-शांति, रुके हुए काम पूरे होना, धन, वैभव और सम्मान प्राप्ति का यह संकेत माना जाता है। इसके अलावा इस सपने का यह भी अर्थ है कि आपके घर में कोई न कोई मांगलिक कार्यक्रम होने वाला है।

6-सपने में रामभक्त हनुमानजी को देखना ;-

सपने में अगर आप रामभक्त हनुमानजी को देखते हैं तो यह काफी शुभ माना जाता है। हालांकि हनुमानजी के अलग-अलग रूपों का अलग-अलग फल मिलता है। जैसे कि अगर आपने सपने में विशाल हनुमानजी देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपको दुश्मनों से जल्द ही छुटकारा मिलने वाला है। वहीं आप ने हनुमानजी का मंदिर देखा है तो इसका अर्थ है कि आपकी मनोकामना जल्द ही पूरी होने वाली है। अगर हनुमानजी सोते हुए नजर आ रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपको आरोग्य का आशीर्वाद मिला है। अगर हनुमानजी मुस्कराते हुए नजर आ रहे हैं तो भविष्य में आपकी जिंदगी में सब मंगल ही मंगल होने वाला है। अगर आपने हनुमानजी उड़ते हुए देखे हैं तो जिस क्षेत्र में आप कार्य कर रहे हैं तो उसका कद बढ़ने वाला है और नई उपलब्धियां प्राप्त होने वाली हैं।

7-सपने में भगवान विष्णु को देखना ;-

अगर आप सपने में सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु को देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपके भाग्य का उदय होने वाला है। साथ ही आपके सभी कष्ट दूर होने वाले हैं और धन-धान्य की पूर्ति के साथ ऐशवर्य की भी प्राप्ति होने वाली है। इस सपने का यह भी अर्थ है कि बड़ा लाभ मिलने वाला है।

8-सपने में माता महालक्ष्मी को देखना ;-

अगर आप सपने में महालक्ष्मी को देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आपको जल्द ही धन लाभ होने वाला है। नौकरी व व्यवसाय में आपकी तरक्की होगी और अटके हुए धन की जल्द प्राप्ति होगी। क्योंकि माता लक्ष्मी को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही रचनात्मक क्रियाओं में आपका मन लगेगा।यदि आप सपने मेें मां लक्ष्मी को कमल के आसान पर विराजमान देखते हैं तो यह बहुत ही शुभ स्वप्न माना जाता है। यह स्वप्न धन दायक माना जाता है। यदि आपने ऐसा सपना देखा है तो यह संकेत है कि यदि कहीं पर बहुत दिनों से आपका धन रुका हुआ  है तो जल्दी ही वह आपको मिलने वाला  है। इसके अलावा यह स्वप्न व्यापार में मुनाफे का संकेत भी देता है।

9-सपने में माता सरस्वती को देखना ;-

अगर आप सपने में माता सरस्वती को देखते हैं तो इसका अर्थ है कि शिक्षा के क्षेत्र में आपको तरक्की मिलने वाली है। आपके द्वारा किए जा रहे प्रयासों में आपके सफलता मिलेगी और मानसिक शांति भी प्राप्त होगी। साथ ही परिवार में सुखशांति का वास रहेगा और घर के सभी सदस्यों में आपसी प्रेम बना रहेगा।

....SHIVOHAM....