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क्या कुंडलिनी जागरण नये द्वारों पर दस्तक है? PART-02

कुंडलिनी ...नये द्वारों पर दस्तक:-

09 FACTS;-

1- जब तुम्हारी कुंडलिनी जागनी शुरू होती है तो वह कुछ ऐसे नये द्वारों पर भी चोट करती है जो सामान्य नहीं हैं। इनसे तुम्हें कुछ और चीजों का पता चलना शुरू होता है ;जो कि इन आंखों से ,हाथों से पता नहीं चलता था। अथार्त तुम्हारी अंतर इंद्रियों पर चोट होनी शुरू हो जाती है। अभी भी तुम्हारी कुंडलिनी की शक्ति ही इन आंखों को और कानों को चला रही है, लेकिन ये बहिर इंद्रिया हैं। और बहुत छोटी सी मात्रा से कुंडलिनी इनको चला लेती है। अगर तुम उस मात्रा में थोड़ी सी भी बढ़ती कर दो, तो तुम्हारे पास अतिरिक्त शक्ति होगी जो नये द्वारों पर चोट कर सके।उदाहरण के लिए हम यहां से पानी बहा दें। अगर पानी की एक छोटी सी मात्रा हो, तो पानी की एक लीक बन जाएगी और फिर पानी उसी में से बहता हुआ चला जाएगा। लेकिन पानी की मात्रा एकदम से बढ़ जाए तो तत्काल नई धाराएं शुरू हो जाएंगी; क्योंकि उतने पानी को पुरानी धारा न ले जा सकेगी।

2-तो कुंडलिनी को जगाने का गहरा शारीरिक अर्थ यह है कि तुम्हारे पास इतनी ऊर्जा हो कि तुम्हारे पुराने द्वार उसको बहाने में समर्थ न रह जाएं। तब अनिवार्यरूपेण उस ऊर्जा को नये द्वारों पर चोट करनी पड़ेगी और तुम्हारी नई इंद्रियां आनी शुरू हो जाएंगी।उन इंद्रियों में बहुत तरह की इंद्रियां हैं ;उनसे टेलीपैथी होगी, क्लेअरवायन्स होगा। तुम्हें कुछ चीजें दिखाई पड़ने लगेंगी, कुछ सुनाई पड़ने लगेंगी, जो कि कान की या आँख की नहीं हैं।तुम्हारे भीतर नई इंद्रियां सक्रिय हो जाएंगी। और इन्हीं इंद्रियों की सक्रियता का गहरे से गहरा फल होगा। तुम्हारे शरीर के भीतर जो अदृश्य लोक है ,जो सूक्ष्मतम अदृश्य छोर है,जिसको आत्मा कहते रहे हैं.. उसकी प्रतीति होनी शुरू हो जाएगी। तो कुंडलिनी के जागने से ही तुम्हारे भीतर यह संभावनाएं बढ़ेगी। शरीर से काम शुरू होगा।यह कुंडलिनी को जगाने का साधारणत: प्रयोग हुआ है। पर फिर भी कुंडलिनी पूरा कुंड नहीं है।

3- एक दूसरा प्रयोग भी है परन्तु पृथ्वी पर बहुत थोड़े से लोगों ने ही उस पर काम किया है। वह कुंडलिनी जगाने का नहीं है, बल्कि कुंड में डूब जाने का है। समग्र चेतना को अपने उस कुंड में डुबा देना है। तब कोई नई इंद्रिय नहीं जागेगी; न ही कोई अतींद्रिय अनुभव नहीं होंगे, और आत्मा का अनुभव एकदम खो जाएगा, परन्तु सीधा परमात्मा का अनुभव होगा।कुंडलिनी की शक्ति जगाकर जो अनुभव होंगे, वह तुम्हें पहले आत्मा का अनुभव होगा; और उसके साथ एक प्रतीति होगी कि दूसरे की आत्मा अलग है, मेरी आत्मा अलग है। जिन लोगों ने कुंडलिनी की शक्ति जगाकर अनुभव किए हैं, वे अनेक आत्मवादी हैं; वे कहेंगे कि अनेक आत्माएं हैं, हर एक के भीतर अलग आत्मा है। लेकिन जिन लोगों ने कुंड में डुबकी लगाई है, वे कहेंगे आत्मा है ही नहीं, परमात्मा ही है; अनेक नहीं हैं, एक ही है। क्योंकि उस कुंड में डुबकी लगते से ही तुम अपने ही कुंड में डुबकी नहीं लगाते तुम, सबका जो सम्मिलित कुंड है, उसमें तत्काल प्रवेश कर जाते हो ।

4-तुम्हारा , मेरा कुंड और उनका कुंड अलग-अलग नहीं हैं। इसीलिए तो कुंड अनंत शक्तिवान है। तुम उसमें से कितना ही उठाओ, तो भी कुछ नहीं उठता। तुम उसमें से कितनी बाल्टी पानी अपने घर के काम के लिए भर लाए हो , उससे वहां कुछ फर्क नहीं पड़ता। हम सागर से कुछ ले आए हैं। लेकिन एक व्यक्ति सागर में डूब गया! तब वह कहता है कि पानी की बाल्टी की कोई बात नहीं है, और किसी का पानी अलग नहीं है। सागर एक है, वह जिसे तुम घर ले गए हो, वह भी इसी का हिस्सा है। और कुछ दूर नहीं हो गया है, वह लौट आएगा। अभी धूप पड़ेगी और भाप बनेगी और बादल बनेंगे, वह सब लौट आएगा। वह कहीं दूर नहीं गया है, वह दूर जा नहीं सकता, वह सब यहीं लौट आएगा।तो जिन लोगों ने कुंडलिनी को जगाने के प्रयोग किए, उन लोगों को अतींद्रिय अनुभव हुए। जो कि साइकिक, जो कि मनस की बड़ी अदभुत अनुभूतियां हैं। और उन्हें आत्मअनुभव हुआ। जो कि परमात्मा का सिर्फ एक अंश है; जहां से तुम परमात्मा को पकड़ रहे हो।

5-तो आत्मा जो है.. वह परमात्मा को एक कोने से छूना है।और उसे छूने के लिए एक छोटी सी शक्ति भी जग जाए तो तुम छू लोगे।और इसलिए इस मार्ग से चलने पर एक दिन आत्मा को भी खोना पड़ता है, नहीं तो रुकावट हो जाती है । फिर आत्मा को भी खोकर कुंड में छलांग लगानी पड़ती है। लेकिन यह आसान है। कई बार ऐसा होता है कि लंबा रास्ता आसान रास्ता होता है, और निकटतम रास्ता कठिन रास्ता होता है। उसके कारण हैं।लंबा रास्ता सदा आसान रास्ता होता है।अब जैसे, किसीको अपनी ही शक्ल देखनी हो, तो भी एक आईना रखना पड़े। अब यह फिजूल की लंबी यात्रा है कि आईने में शक्ल जाएगी और आईने से वापस लौटेगी, तब देख पाऊंगा। यह इतनी यात्रा करनी पड़ेगी। लेकिन अपनी शक्ल को सीधा देखना, निकटतम तो है, लेकिन कठिनतम भी है।तो यह जो कुंडलिनी की छोटी सी शक्ति को उठाकर थोड़ी लंबी यात्रा तो होती है, क्योंकि अंतरइंद्रियों का सारा का सारा जगत खुलता है और आत्मा पर पहुंचत